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अब मनरेगा मजदूर लड़ेंगे नशे के खिलाफ

अब मनरेगा मजदूर लड़ेंगे नशे के खिलाफ

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शिमला। राज्य में फैल रहे नशे के मकड़जाल से युवा पीढ़ी और समाज को बचाने के लिए राज्य सरकार और सख्त कदम उठाएगी। पिछले वर्ष ड्रग्स माफिया के खिलाफ छेड़े गए अभियान से उत्साहित राज्य सरकार प्रदेश में अब और व्यापक रूप में अभियान छेड़ेगी। ड्रग्स के खिलाफ लड़ी जा रही इस लड़ाई में मनरेगा मजदूरों को भी शामिल किया जाएगा। पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा और जम्मू-कश्मीर से हो रही नशे की तस्करी को रोकने के लिए भी सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई है और इसके लिए स्पेशल ड्राइव चलाया जा रहा है।


  • मुख्य सचिव और डीजीपी की पत्रकारवार्ता
  • पड़ोसी राज्यों की सीमाओं पर बढ़ाए जाएगी चौकसी
  • ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट के संशोधनों को केंद्र से मंजूरी का इंतजार

राज्य के मुख्य सचिव वीसी फारका और डीजीपी संजय कुमार ने यहां संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सरकार नशे के कारोबारियों पर पैनी नजर रखे हुए है और दवा उद्योग पर भी सरकार की नजर है। फारका ने कहा कि अब दवा बनाने वाले उद्योगों द्वारा लाए जा रहे कच्चे माल पर भी नजर होगी। उद्योग कितना कच्चा माल ला रहे हैं और उससे कितना उत्पाद तैयार किया गया है, उसकी पूरी जानकारी जुटाई जाएगी।

इससे नशे के कारोबार में लगे उद्योगों पर भी नकेल कसी जा सकेगी। फारका ने कहा कि नशे के खिलाफ पिछले वर्ष चलाए गए विशेष अभियान के तहत सरकार ने नशे के सभी ठिकानों पर कार्रवाई की और स्थानीय जनता के सहयोग से अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई के तहत ही राज्य सरकार ने पिछले वर्ष ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट में 4 अहम संशोधन किए हैं। अब इस संशोधन को केंद्र से मंजूरी मिलनी बाकी है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार नशे के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई कर पाएगी। नशे के कारोबारियों पर शिकंजा कसने के लिए इसे गैर जमानती बनाया जाएगा। इसके अलावा नशे के सौदागरों की संपत्तियां जब्त हो पाएंगी। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए समाज के सहयोग से लड़ाई लड़ी जा रही है और इसमें समाज के हर वर्ग को जोड़ा जा रहा है। इसमें युवक मंडल, महिला मंडल और अन्य सामाजिक संगठन अहम हैं। उन्होंने कहा कि अफीम की खेती कुल्लू घाटी में ही नहीं होती, बल्कि चंबा के चुराह और सिरमौर जिले के दूरदराज के इलाकों में भी होती है। इसके खिलाफ इस वर्ष समय पर कार्रवाई शुरू होगी और उम्मीद है कि इस बार उनका अभियान और सफल रहेगा।

इस मौके पर डीजीपी संजय कुमार ने कहा कि वर्ष 2015 में एनडीपीएस के 622 मामले सामने आए थे, जबकि 2016 में यह बढ़कर 929 हो गए। उन्होंने कहा कि 2015 में 283 किलो चरस पकड़ी गई थी, जबकि 2016 में 377.5 किलो चरस बरामद की गई। इसी तरह 2015 में 5 किलो के मुकाबले 2016 में 27 किलो अफीम पकड़ी गई। उन्होंने कहा कि 2015 में केवल 800 ग्राम गांजा ही पुलिस ने पकड़ा था, लेकिन 2016 में 91.74 किलो गांजा पकड़ा है। उन्होंने कहा कि इस साल कुल्लू में एक विदेश के कब्जे से 1256 किलो गांजा और 1.5 किलो हेरोइन बरामद की गई। संजय कुमार ने कहा कि 2015 में नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में 723 लोग पकड़े गए थे, जबकि 2016 में यह आंकड़ा1079 जा पहुंचा। दोनों सालों में 6-6 विदेशी भी पकड़े गए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अब नशे के सौदागरों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई शुरू की है और इनके मामलों में वित्तीय जांच भी शुरू की है। पुलिस ने कांगड़ा जिले में 4 मामलों में संपत्ति जब्त की है। पुलिस ने ईडी को भी इनके मामले भेजे हैं। उनका कहना था कि सरकार ने नारकोटिक्स के लिए अलग से सेल बनाए हैं और तीनों जोन में डीएसपी के अलग से पद सृजित किए हैं। उन्होंने कि नशे के खिलाफ जीरो टालरेंस की निति के तहत अभियान चलेगा और इसे अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

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