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Mayawati का नया पैंतरा, Opposition में बैठेंगे पर गठजोड़ नहीं करेंगे

Mayawati का नया पैंतरा, Opposition में बैठेंगे पर गठजोड़ नहीं करेंगे

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लखनऊ। यूपी में राजनीतिक विसात के बीच बसपा सुप्रीमो ने एक ओर चाल चल दी है। अबकी बार उनकी यह चाल मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए हैं। मायावती ने कहा है कि चुनाव के बाद अगर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो वो विपक्ष में बैठना पसंद करेंगी, न कि किसी राजनीतिक दल के साथ गठजोड़ करके सरकार बनाना। गौर रहे कि सत्ता के प्रमुख दावेदारों में और कोई पार्टी ऐसा बयान देती नज़र नहीं आ रही है।

  •   मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए चला दाव

उधर, ऐसा कहने के पीछे दरअसल मंशा यह थी कि बीजेपी विरोधी वोट बंटे और जीत के लिए दो धड़ों के बीच टकराव तीनध्रुवीय बन जाए, इससे बीजेपी को लाभ मिल सकता है। किसी एक पार्टी या गठबंधन के साथ टकराव बीजेपी विरोधी मतों को लामबंद करेगा, लेकिन इस बयान की जड़ में अब अपने को दूसरे से मज़बूत बताने की प्रतिस्पर्धा भी समाहित है। मायावती के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वो लोगों को बताएं कि वो मज़बूत हैं और उनमें विश्वास करके लोग बसपा को वोट दें।

मायावती ऐसा स्थापित कर पाएं, इसके लिए सबसे पहले ज़रूरी है कि अपने चुनावी समीकरण को वो बांधे रख पाएं. मायावती का दांव इसबार दलित-मुस्लिम समीकरण पर है और इसमें उन्हें सेंध लगती नज़र आ रही है। मुस्लिम मतदाताओं के बीच अभी भी सपा को बसपा से अधिक प्राथमिकता मिल रही है, उसकी वजह है मायावती का भाजपा के साथ गठबंधनों का इतिहास। मुस्लिम मतदाता को लगता है कि सीटों की कमी पड़ी तो मायावती कहीं फिर से बीजेपी का साथ लेकर सरकार न बना लें, ऐसा हुआ तो वह ठगे जाएंगे और इसीलिए वो इस स्थिति से बचने के लिए सपा को शायद पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। मायावती अगर केवल जीत का दंभ भरती रहीं तो अंदर ही अंदर मुस्लिम वोट खिसकता जाएगा और उनके लिए स्थिति कठिन हो जाएंगी। ऐसे में उन्हें तत्काल यह समझाने की ज़रूरत है कि वो किसी भी हाल में बीजेपी के साथ नहीं जाएंगी। बीजेपी के साथ समझौता नहीं, भले ही विपक्ष में बैठना पड़े, ऐसा बयान दरअसल सूबे के मुस्लिम मतदाताओं के लिए मायावती का संदेश है ताकि वो शक और भय से उबरकर उनके लिए वोट कर सकें, ऐसा अगर हो पाता है तो एक नकारात्मक दिखने वाला बयान मायावती के लिए एक सकारात्मक तस्वीर तैयार कर सकता है ज़ाहिर है कि मायावती के विरोधी इस बयान को उनकी हार की स्वीकारोक्ति के तौर पर दिखाने का काम करेंगे. लेकिन विपक्ष के इस हमले से मायावती कमज़ोर कम, प्रतिबद्ध ज़्यादा नज़र आएंगी।

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