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MBBS: एमएमयू ने सरकार के सिर फोड़ा ठीकरा, मंत्री खामोश

MBBS: एमएमयू ने सरकार के सिर फोड़ा ठीकरा, मंत्री खामोश

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गफूर खान/धर्मशाला। प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा एमबीबीएस की काउंसलिंग के बाद महृषि मारकंडेश्वर यूनिवर्सिटी कुमारहट्टी जिला सोलन में दाखिला नहीं देने के मामले में एमएमयू ने इस सारे प्रकरण के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। MMU ने बाकायदा एक विज्ञापन जारी करके दाखिला नहीं देने का कारण प्रदेश सरस्कार की नकारात्मक कार्यप्रणाली को बताया है।mbbs-admission MMU ने अभ्यर्थियों के परिजनों और आम लोगों को संबोधित करते हुए अपील की है कि बच्चों को दाखिला नहीं देने के मामले में उनकी कमजोर वित्तीय स्थिति आड़े आ रही है।  संस्थान सेल्फ फाइनेंस के तहत चलाया जाता है और इसके संचालन के लिए संस्थान को मिलने वाली फीस पर ही निर्भर रहना पड़ता है। प्रदेश सरकार को एमएमयू ने 20 जून 2016 को एक पत्र लिखकर फीस बढ़ाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन इस मसले पर सरकार की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं आया। 29 जून को उच्च शिक्षा विभाग से इस बारे पत्राचार किया गया, उसका भी कोई जवाब नहीं आया। 28 जुलाई को स्वास्थ्य शिक्षा निदेशक से इस बारे में बैठक बेनतीजा रही। इसके बाद भी कई मर्तबा फीस बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया, लेकिन सरकार की तरफ से किसी तरह का रिस्पांस नहीं आया। इस माह की 3 तारीख को बिना MMU की कोई बात सुने छात्रों को दाखिला दिया गया। इस पर जब एमएमयू ने दाखिला देने से इंकार किया और स्वास्थ्य शिक्षा विभाग को अपने प्रस्ताव पर विचार करने को कहा तो विभाग ने किसी तरह का प्रस्ताव मिलने से ही इनकार कर दिया। इस पर 7 तारीख को फिर से प्रोपोजल भेजा गया, जिसका अभी तक कोई रिस्पांस नहीं आया है। इसके अलावा प्रिंसिपल सेक्रेटरी से भी 6 और 8 सितंबर को हुई बैठक का भी कोई परिणाम नहीं निकल पाया है। एमएमयू प्रशासन का कहना है कि वह पिछले 3 वर्ष में करीब 57 करोड़ का घाटा उठा चुके हैं।student एमएमयू ने सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार नाहन मेडिकल कॉलेज को 50 करोड़ का बजट दे रही है और हमसे उम्मीद कर रही है कि हम 8 करोड़ में सत्र चलाएं। एमएमयू प्रशासन ने प्रदेश सरकार पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार ने उन्हें नियमों के विपरीत जाकर प्रदेश विश्वविद्यालय से संबद्धता लेने के लिए दबाव बनाकर बाध्य किया, जबकि ऐसा करने का कोई ओचित्य नहीं था। सरकार के नकारात्मक और प्रतिशोधात्मक रवैये के कारण एमएमयू में पढ़ रहे 450 बच्चों का भविष्य भी दांव पर लगा हुआ है। दो साल से एमसीआई का निरीक्षण लंबित पड़ा है। नियमों के मुताबिक एमएमयू 15 फीसदी एनआरआई कोटे के दाखिले दे सकती है लेकिन प्रदेश सरकार ने इसे घटाकर साढ़े 7 फीसदी कर दिया है।मएमयू ने प्रदेश सरकार को पूरी तरह से कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है और सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री इन आरोपों पर कुछ भो बोलने से कतरा रहे हैं। इस बारे में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।

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