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MC Election : गलतियां प्रशासन की, ठीकरा Software पर !

MC Election : गलतियां प्रशासन की, ठीकरा Software पर !

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MC Election: गंभीरता से नहीं ली जनता व राजनीतिक दलों की मांग

MC Election: शिमला। नगर निगम शिमला के चुनाव को मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों का हवाला देकर टालना प्रशासनिक रवैये की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। नगर निगम चुनावों को लेकर इस बार मतदाता सूचियों का खाका सार्वजनिक होने के बाद से जिस तरह से हाय-तौबा मची थी, उससे जिला प्रशासन ने हलके में लिया और आम जनता से लेकर राजनीतिक दलों की गुहार तक को गंभीरता से नहीं लिया। यही नहीं, जिला प्रशासन ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का ठीकरा बेजुबान सॉफ्टवेयर पर फोड़ दिया था और आज इसका नतीजा आज सामने है कि चुनाव टाले गए हैं। राजनीतिक दलों ने तो राज्य निर्वाचन आयुक्त पी मित्रा का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन समस्या का समाधान न निकला।

गलतियों को गंभीरता से ठीक करने का नहीं किया प्रयास

नगर निगम के नए सदस्यों को 3 जून को कार्यभार संभालना होता है और यह पहले से तह होता है। इसके बाद भी जिला प्रशासन ने समय पर न तो मतदाता सूचियों को चैक किया और न ही उसमें गलतियों को गंभीरता से ठीक करने का प्रयास किया। हर पोलिंग बूथ के लिए एक बीएलओ को भी तैनात किया गया था, लेकिन वे संबंधित बूथ के तहत आने वाले घरों तक ही नहीं गए। इससे बड़ी लापरवाही और क्या हो सकती है, कि फीजिकल वैरीफिकेशन तक नहीं की गई। यदि यह सब किया होता तो आज चुनाव को टालने की नौबत नहीं आती।


जब मामला उजागर हुआ और हर दिन नए तथ्य सामने आने लगे तो ठीकर साफ्टवेयर पर फोड़ा गया। कहा गया कि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ है, लेकिन असल कारण कुछ और है और इसे दबाने का प्रयास किया गया। कारण यह है कि जिन कर्मचारियों को इसे सही रूप में कार्य करना था, उन्होंने इसमें कथित तौर पर कोताही बरती, लेकिन यह किसी अधिकारी को नजर नहीं आ रही।

पहली बार टले निगम के चुनाव

नगर निगम शिमला के इतिहास में ऐसा पहली बार हुई है कि वोटर लिस्टों में गड़बड़ी के कारण चुनाव टालने पड़े। इससे सवाल यह पैदा होता है कि जब प्रशासन एक नगर निगम के चुनाव को करवाने के लिए मतदाता सूचियों को सही रूप में तैयार नहीं कर सकता तो वह बड़े चुनाव कैसे करवाएगा, लेकिन इस चुनाव को प्रशासन ने हलके में लिया और निचले स्तर के कर्मचारियों पर सब छोड़ दिया और उन्होंने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इससे लोगों में भी रोष है। क्योंकि वार्डों का आरक्षण तय होने के बाद संभावित प्रत्याशियों ने वार्डों में संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया था और अब ऐकाएक चुनाव टालने से उनको झटका लगा है। अब राज्य निर्वाचन आयोग ने जिस तरह से वैरीफिकेशन और अन्य कार्यों के लिए लंबा समय दिया है, उस तरह से पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

नए सिरे से होगी मतदाता सूचियों की प्रक्रिया

कुल मिलाकर, इस सारी प्रक्रिया से प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है और अब मतदाता सूचियों की सारी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करनी पड़ रही है। इससे जिला प्रशासन की घोर लापरवाही को भी खुलकर सामने आई है और अब इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। इसे लेकर विपक्षी बीजेपी आग बबूला हो गई है और उसके निशाने पर सत्ताधारी कांग्रेस आ गई है। बीजेपी ने तो इसे हार से बचने का उपाय करार दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अब राजनीति और गरमाएगी और आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू होगा।

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