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बजट सत्रः Medical college के मसले पर भिड़े Dhumal-Kaul

बजट सत्रः Medical college के मसले पर भिड़े Dhumal-Kaul

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शिमला। राज्य में मेडिकल कॉलेज खोलने और ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ नेरचौक अस्पताल के मामले में स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल आमने-सामने आए। दोनों ने एक-दूसरे पर टिप्पणियां की और ईएसआईसी को किसने लाया, यह कैसे आया और मंडी मेडिकल कॉलेज की अधिसूचना कैसे जारी हुई और कैसे एक महिला अफसर रोई, इसके राज धीरे-धीरे सबके सामने आए।

  • प्रश्नकाल के दौरान गुलाब सिंह के सवाल पर हुई बहस
  • कौल बोले, कॉलेज के लिए श्रम मंत्रालय के कारण हो रही देरी
 शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी सदस्य ठाकुर गुलाब सिंह ने ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज नेरचौक को राज्य सरकार को ट्रांसफर करने की सारी औपचारिकताएं पूरी करने और वहां पर एमसीआई की टीम के दौरे को लेकर सवाल किया था। गुलाब सिंह ने वहां स्टाफ की तैनाती और वहां उपकरणों की खरीद को लेकर भी अनुपूरक सवाल किए।  इन सवालों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने कहा कि ईएसआईसी अस्पताल और कॉलेज को चलाने में देरी श्रम मंत्रालय के कारण हो रही है। उन्होंने कहा कि एमसीआई की टीम ने 9 और 10 दिसंबर 2016 को वहां निरीक्षण किया था और उन्होंने कुछ आपत्तियां दर्ज की थी। आपत्तियों को दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नेरचौक मेडिकल कॉजेल के लिए प्रिसिंपल समेत 335 पदों को भर दिया गया है और अगस्त से वहां एमबीबीएस की 100 सीटों के लिए दाखिला दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईएसआईसी ने वहां अभी 8 भवन सरकार को सौंपे हैं और बाकी को भी जल्द सौंपा जाएगा। कौल सिंह ईएसआईसी को स्थापित करने को केंद्र की यूपीए सरकार की उपलब्धि बता रहे थे और कहा कि तत्कालीन श्रम मंत्री आस्कर फर्नांडीज ने उनके आग्रह पर इसे स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि आस्कर फर्नांडीज ने ही इसका शिलान्यास किया था और उन्होंने ही इसका उद्घाटन किया था। इसके बाद केंद्र में सरकार बदली और फिर एनडीए सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और श्रम मंत्री से इसको टेकओवर को लिखा, लेकिन श्रम मंत्रालय की कई बड़ी शर्तें थी। इस कारण मामला लटका और फिर अब वे माने और उन्हें 5 वर्षों में 285 करोड़ रुपए वापस किए जाएंगे। इस बीच, नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने अनुपूरक सवाल करते हुए मंत्री पर अपनी वाकपटुता से सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि यूपीए ने निर्णय लिया था कि जो राज्य सरकारी जमीन देंगे और यहां ईएसआईसी की जरूरत है, उन्हें ईएसआईसी दिया जाएगा। उस वक्त राज्य की बीजेपी सरकार ने मंडी के नेरचौक में जमीन चिन्हित कर दी थी। उन्होंने मंडी में मेडिकल कॉलेज खोलने की अधिसूचना जारी करने का भी जिक्र किया और कहा कि वे जानते हैं कि कैसे बैक डेट से अधिसूचना जारी हुई और जब मामला चुनाव आयोग पहुंचा तो एक संबंधित महिला अधिकारी को आयोग ने फटकार लगाई और बाद में जब बीजेपी की सरकार बनी तो उक्त अधिकारी उनके पास ‘रोईं’ और कहा कि उनसे यह मजबूरी में कराया था। इस पर कौल सिंह ने कहा कि इसका फैसला केबिनेट में हो गया था और अधिसूचना कब हुई इसका उन्हें पता नहीं। धूमल ने हमीरपुर में मेडिकल कॉलेज को शुरू करने को लेकर भी सवाल किया और कहा कि इसे जल्द से जल्द शुरू किया जाए।
हमीरपुर में जमीन फाइनल
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हमीरपुर में जमीन को फाइनल किया जा रहा है। वहां पर शिक्षा विभाग, आयुर्वेद और हिमु़डा की जगह है, उसे टेकओवर करने को कहा है और इन विभागों से चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि ईएसआईसी और हमीरपुर में स्टाफ को जल्द स्टाफ उपलब्ध करवाया जाएगा और फिर इनमें कक्षाएं शुरू करवाई जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने सदन में कहा कि 2007 में चुनाव आयोग ने हिमाचल के साथ नाइंसाफी की थी। आयोग ने पांच महीने पहले आचार संहिता लगा दी। इस मामले को लेकर वे चुनाव आयुक्त से भी मिले थे। आयोग के कार्यालय से जब वे बाहर निकल रहे तो पूर्व सीएम धूमल और शांता कुमार समेत बीजेपी के नेता चुनाव आयुक्त से मिलने गए। तत्कालीन चुनाव आयुक्त की निष्ठाएं किस ओर थी वह इस पर नहीं जाना चाहते। इस पर धूमल ने कहा कि आचार संहिता के बाद कांग्रेस के नेता हेलिकॉप्टर से दिल्ली जाते रहे। शिकायत हुई तो चुनाव आयोग ने यह पैसा पार्टी के खाते से वसूलने के आदेश दिए। इस बीच, कौल सिंह ने कहा कि उन्होंने वह अदा किया। धूमल बोले, अदा तो करना ही था जब चुनाव आयोग के आदेश हुए थे।

 

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