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ग्रामीणों का दर्द : न Cement का कारखाना लगा, न मिला रोजगार 

ग्रामीणों का दर्द : न Cement का कारखाना लगा, न मिला रोजगार 

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भू-अधिग्रहण अधिनियम की धारा-4  को हटाने की मांग

सुंदरनगर। हमारे नेता भावनाओं में बह कर जनता के सामने घोषणाएं तो बड़ी-बड़ी कर जाते हैं लेकिन उन्हें धरातल पर उतरते वर्षों लग जाते हैं। नेताओं की घोषणाओं से प्रभावित होकर भोली-भाली जनता भी अपने भविष्य की योजनाओं के जाल बुनने लगती है लेकिन सच्चाई कुछ और ही होती है। ऐसा ही कुछ सुंदरनगर में प्रस्तावित सीमेंट कारखाने को लेकर हो रहा है। पिछले करीब एक दशक से लोग सीमेंट फैक्टरी लगने की आस लगाए बैठे हैं। जब फैक्टरी लगाने की बात चली थी तो यह भी कहा गया था कि इसके खुलने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। आज हालत यह है कि एक दशक बीत गया पर न तो सीमेंट फैक्टरी लगी और न यहां के लोगों को रोजगार मिला। इतना ही नहीं  पिछले दस साल से लोग अपनी ही भूमि पर कोई रोजगार के साधन पैदा नहीं कर सके क्योंकि क्षेत्र में भू-अधिग्रहण अधिनियम की धारा-4 को लगाया गया है।

जमीन से जुड़ा कोई काम नहीं कर पा रहे ग्रामीण

सुंदरनगर में प्रस्तावित सीमेंट कारखाने के खनन क्षेत्र केरन, मुलख मैदान, बगैण, खमारडा, सुसण, ज्वाला और नागबाबा के ग्रामीणों ने विधायक राकेश जम्वाल को ज्ञापन सौंप दस साल पहले उनके क्षेत्र में लगाई गई भू-अधिग्रहण अधिनियम की धारा-4 को निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि एक दशक बीतने के बाद भी उनकी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया है। धारा-4 लागू होने के कारण उनके क्षेत्र में विकास के कार्य भी ठप हो कर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि एक दशक में परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ने के कारण नए निर्माण की आवश्यकता पड़ रही है। अपनी पुश्तैनी जमीन होते हुए भी वह उसको लेकर न तो कोई खरीद-फरोख्त कर पा रहे हैं और न स्वरोजगार के लिए कोई लघु उद्योग स्थापित कर पा रहे हैं। अगर हम उसमें कोई काम अथवा निर्माण करते हैं तो धारा-4 का हवाला देते हुए प्रशासन उन्हें इससे बेदखल कर देता है। इससे ग्रामीणों को लाखों का नुकसान सहना पड़ रहा है।

विधायक बोले, सरकार के समक्ष उठाएंगे मामला

प्रतिनिधिमंडल में शामिल ग्रामीण दीवान चंद, डीसी कौंडल, भूपेंद्र ठाकुर, देशराज पराशर, गोविंद वर्मा, बिशन चंद, अभिषेक सेन और देवी सिंह ने बताया कि पूर्व सरकार के समय में भी उन्होंने धारा-4 को हटाने के लिए कई बार सरकार से मांग की, लेकिन हर बार उनकी बजाए कंपनी की ही सुनवाई की गई। उन्होंने विधायक से तुरंत इस धारा को हटाने की मांग की है। विधायक राकेश जम्वाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि वह इसके बारे में सरकार के समक्ष मामला उठा कर इसके निदान के बारे में चर्चा करेंगे जिससे क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों को राहत मिल सके।

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