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पार्किंग शुल्कः प्रशासन का यू टर्न, पहले एक घंटे नहीं लगेगा शुल्क

पार्किंग शुल्कः प्रशासन का यू टर्न, पहले एक घंटे नहीं लगेगा शुल्क

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धर्मशाला। मिनी सचिवालय कांगड़ा में पार्किंग शुल्क के चारों तरफ विरोध के बाद कांगड़ा जिला प्रशासन ने यू टर्न ले लिया है। राहत देते हुए जिला प्रशासन ने पहले एक घंटे किसी भी प्रकार का पार्किंग शुल्क न वसूल करने का निर्णय लिया है। एक घंटे से अधिक समय तक गाड़ी खड़ी करने पर निर्धारित न्यूनतम दरों पर शुल्क वसूला जाएगा। कांगड़ा जिला प्रशासन के प्रवक्ता ने आज जानकारी देते हुए बताया कि कांगड़ा शहर में स्थानीय लोगों की सुविधा के साथ-साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं एवं अन्य पर्यटकों की सहूलियत के लिए संयुक्त कार्यालय भवन परिसर में व्यवस्थित पार्किंग सुविधा विकसित की गई है। उन्होंने कहा कि परिसर में वाहन पार्किंग के पहले एक घंटे तक सभी को निःशुल्क पार्किंग सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। एक घंटे से अधिक समय तक गाड़ी खड़ी करने के उपरांत निर्धारित न्यूनतम दरों पर शुल्क वसूला जाएगा। लोगों की सुविधा के लिए संयुक्त कार्यालय परिसर पार्किंग में शुल्क की दरें नगर परिषद कांगड़ा की पार्किंग दरों से कम रखी गई हैं। प्रवक्ता ने कहा कि इस व्यवस्था से लोगों को शहर के बीचों-बीच बेहतर पार्किंग सुविधा उपलब्ध होने से शहरवासियों सहित निजी वाहनों के साथ यहां आने वाले अन्य सभी लोग लाभान्वित होंगे। इससे जहां पार्किंग की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध होगी, वहीं सुरक्षा की दृष्टि से भी ये कदम हितकर सिद्ध होगा।

parking2मिनी सचिवालय पार्किंग टेंडर में आपत्तियां निराधार

कांगड़ा कार्यालय परिसर में पार्किंग टेंडर के संदर्भ में कुछ आपत्तियां प्राप्त होने पर जिला प्रशासन ने इस बारे में संबंधित उपमंडलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। उपमंडलाधिकारी से प्राप्त रिपोर्ट के अध्ययन से पार्किंग परिसर से जुड़ी सभी आपत्तियां एवं भ्रांतियां निराधार पाई गईं हैं। रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट हुआ है कि पार्किंग टेंडर से जुड़ी सभी औपचारिकताएं नियमानुसार पूर्ण की गई हैं। प्रवक्ता ने कहा कि पूर्व में प्रायः यह देखा गया है कि बज्रेश्वरी मंदिर आने वाले श्रद्धालु और आस-पास के अन्य स्थलों पर घूमने के लिए आने वाले पर्यटक एवं अन्य लोग व्यवस्थित पेड पार्किंग के अभाव में कार्यालय परिसर में अपने वाहन अव्यवस्थित तरीके से घंटों तक पार्क करके चले जाते थे, जिससे अनेक लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता था। पार्किंग रिकॉर्ड के अभाव में अन्य लोगों को गाड़ी निकालने अथवा लगाने के लिए बेतरतीब खड़े वाहन के मालिक का तत्काल पता लगाना संभव नहीं था। पेड पार्किंग से जहां वाहनों को पार्क करने की बेहतर व्यवस्था होगी, वहीं वाहन पार्क करने वालों का रिकॉर्ड भी रखा जा सकेगा, जिससे अन्य लोगों को अपनी गाड़ियां लगाने एवं निकालने में तो सुविधा होगी तथा साथ ही पार्क वाहनों की भी सुरक्षा सुनिश्चित होगी और लोक सुरक्षा के दृष्टिगत भी यह व्यवस्था अधिक कारगर होगी।

parking1 सात महीनों के लिए दी है पार्किंग

कांगड़ा जिला प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट हुआ है कि पार्किंग व्यवस्था के प्रबंधन की जिम्मेदारी बोली के आधार पर प्रदान की गई है। पार्किंग टेंडर 10 लाख रुपये की रिजर्व राशि के आधार पर 10 लाख 21 हजार रुपये की सबसे बड़ी बोली लगाने वाले ठेकेदार को सात महीनों के लिए दिया गया है। पूर्व में भी पार्किंग स्थल के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं तथा 11 महीनों के लिए 10 लाख रुपये की रिजर्व राशि निर्धारित की गई थी। उस समय 31 लाख रुपये की सबसे उच्चतम बोली प्राप्त हुई थी, लेकिन ठेकेदार ने अनुबंध हस्ताक्षर नहीं किया तथा टेंडर प्रक्रिया अधूरी रही थी। इसलिए वर्तमान बोली के लिए 31 लाख रुपये राशि को रेफरेंस के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि वर्तमान पार्किंग के लिए टेंडर आमंत्रित करने के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किए गए थे। प्रवक्ता ने कहा कि जहां तक वर्तमान ठेकेदार को टांडा मेडिकल कॉलेज द्वारा ब्लैक लिस्ट किए जाने का सवाल है, रिपोर्ट से स्पष्ट है कि इस संदर्भ में उपायुक्त कार्यालय अथवा संबंधित उपमण्डलाधिकारी कार्यालय में कोई पूर्व सूचना उपलब्ध नहीं थी। टांडा कॉलेज प्रशासन से पड़ताल के उपरांत यह जानकारी प्राप्त हुई कि कॉलेज प्रशासन ने उक्त ठेकेदार को वर्ष-2013 में टांडा मेडिकल कॉलेज के भीतर टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से ब्लैक लिस्ट किया था, लेकिन संस्थान ने मई, 2016 में यह प्रतिबंध हटा दिया था। संयुक्त कार्यालय परिसर में पार्किंग के लिए वर्तमान टेंडर प्रक्रिया इससे काफी बाद आरम्भ हुई थी।

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