Covid-19 Update

59,148
मामले (हिमाचल)
57,580
मरीज ठीक हुए
987
मौत
11,229,271
मामले (भारत)
117,446,648
मामले (दुनिया)

मिंजर मेले ने दिलाई चंबा को अंतरराष्ट्रीय पहचान

मिंजर मेले ने दिलाई चंबा को अंतरराष्ट्रीय पहचान

- Advertisement -

हिमाचल प्रदेश का चम्बा अपने रमणीय मंदिरों, लोकगीतों और सुंदर कशीदाकारी के लिए विश्वपटल पर अपनी पहचान बना चुका है। इतिहास के तौर पर छठी शताब्दी से चम्बा का नाम जाना जाता है । पर आज के इतिहास और विकास का दौर साहिलवर्मा के शासनकाल से शुरू होता है। रावी नदी के किनारे समुद्र तल से 3200 फीट की ऊंचाई पर बसी यह नगरी पहाड़ी राजाओं की राजधानी थी। इस नगर को राजा साहिलवर्मन ने 920 ई. में स्थापित किया । नगर का नाम उन्होंने अपनी प्रिय पुत्री चंपावती के नाम पर रखा । इस शहर से जुड़ी एक और कहानी है कि इस स्थान पर चंपा फूलों के वृक्षों का भरापुरा जंगल था इसलिए इसका नाम चम्पा पड़ा जो कालांतर में चम्बा हो गया । इस बात की पुष्टि राजा साहिलवर्मा की वंशावली में उनकी वीरता के संबंध में कहा गया है-

विजित्यं क्षत्रियान्युद्धं पुरां चम्पा चकार ह
पुरे चम्पेननालंकृतं देव्याभिरक्षिताम्
चम्पावत्यैव महिषादीन्हत्वेरावती तटे

अर्थात राजा ने क्षत्रियों को युद्ध में हराया और रावी के तट पर चम्पा नगर बसाया जो पहले से ही चम्पक वृक्षों से अलंकृत था जिसकी रक्षा देवी चम्पावती करती थी।जिसने महिषासुर और अन्य का वध किया था।
चम्बा चार समानांतर पर्वतीय शाखाओं जस्कर,पांगी, धौलाधार और हाथीधार के बीच में मुख्य हिमालय पर्वत शृंखला में स्थित है,जिसका एक छोर शिवालिक से जा मिलता है।

शहर ने अपनी प्राचीन संस्कृति को पूरे एहतियात से सुरक्षित- संरक्षित रखा

चम्बा की विशेषता यही है कि इस शहर ने अपनी प्राचीन संस्कृति को पूरे एहतियात से सुरक्षित- संरक्षित रखा है और इसकी भव्यता को कहीं से भी धूमिल नहीं होने दिया है। यह शहर मध्यकाल में निर्मित मंदिरों, ताम्रलेखों,शिलालेखों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों के साथ समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को आज भी संजोए हुए है।
जो भी हो ,पर चम्बा की वादियों में ऐसा कोई सम्मोहन जरूर है जो यहां आने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है। रावी की मस्त रोमांटिक रवानगी, चौगान का हरियालापन और शिखर तथा पर्वतीय शैली से सुशोभित चम्बा किसी भी मायने में शीर्ष पर ही ठहरता है। चम्बा बेमिसाल है पर इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली जब यहां का मिंजर महोत्सव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव घोषित कर दिया गया। इस उत्सव का आरंभ चंबा के राजा की विजय के उपलक्ष्य में हुआ थाऔर अब यह अंतरराष्ट्रीय पर्व बन गया है । एक बार फिर यह शहर मिंजर मेले में अतिथियों का स्वागत करने को तैयार है।

 

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है