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बंदरों का आतंकः 2 की जान गई, 70 के करीब घायल

बंदरों का आतंकः 2 की जान गई, 70 के करीब घायल

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रेवाड़ी के गुरावड़ा गांव में दहशत, घरों से बाहर निकलने से भी सहम रहे लोग

मोहिंदर भारती/रेवाड़ी। बंदरों का खौफ इतना कि लोग घरों से बाहर निकलने से भी कतराने लगे हैं। रेवाड़ी के गुरावड़ा गांव की ऐसी कहानी है कि अब तक इन उत्पाती बंदरों के हमले में दो लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और करीब 70 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। बहरहाल, जिला के गांव गुरावड़ा के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से बंदरों के आतंक से परेशान हैं। इस समस्या को लेकर वह अब तक देश के राष्ट्रपति, पीएम, हरियाणा के राज्यपाल, सीएम और जिला के उपायुक्त तक फ़रियाद लगा चुके हैं, लेकिन उनकी अब तक किसी ने नहीं सुनीं है।

गांव में बंदरों के काटने से दो लोगों की मौत और करीब 70 से ज्यादा इनके आतंक का शिकार हो चुके है। गौर रहे कि गांव में बनी 200 साल पुरानी खंडहर हवेली इन बंदरों की सरणस्थली बनी हुई है। ग्रामीण इस हवेली के मालिक को भी अपनी समस्या से अवगत करवा चुके है, लेकिन उनकी बात को उसने भी अनसुना कर दिया। गांव के सरपंच भी इन खुंखार बंदरों के सामने बेबस है। जब ग्रामीण उनसे इन्हें यहां से दूर भगाने की बात कहते है तो वह उनको एक ही जवाब देते हैं कि उन्हें कई वर्षों बाद पुत्र प्राप्ति हुई है और वह इनको गांव से भगाकर पाप का भागीदार नहीं बनना चाहते। ग्रामीणों ने इसकी लिखित शिकायत राष्ट्रपति, पीएम नरेंद्र मोदी, राज्यपाल हरियाणा, मनोहर सीएम लाल खटटर, जिला उपायुक्त तक करने के बावजूद समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।

अब ग्रामीण इन बंदरों से बचने के लिए न्यायालय की शरण में जाने को मजबूर हो गए हैं। गांव में इस वक्त बंदरों की संख्या डेढ़ सौ से ज्यादा बताई जा रही है और इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी होने से ग्रामीण काफ़ी परेशान है। ग्रामीणों को बंदरों से इतना भय है की जब वह घर से बाहर निकलते है तो पहले दरवाजे की जरासा खोलकर देखते है की कहीं बंदर तो नहीं है। महिलाएं और बच्चे तो घरों के बाहर और छतों पर भी बैठने से डरते है। बहरहाल, लोगों ने सरकार व प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें इन  उत्पाती बंदरों से जल्द निजात दिलाई जाए।

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