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खराहल घाटीः न किताबें, कापियां और न ही वर्दी..कैसे जाएंगे SCHOOL

खराहल घाटीः न किताबें, कापियां और न ही वर्दी..कैसे जाएंगे SCHOOL

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कुल्लू। गाहर अग्नि पीड़ित बच्चों की दास्तां कुछ यूं बनी हुई है कि उनके मकान जल जाने के बाद उनके पास न तो किताबें बच पाई और न वर्दी और कापियां बची हैं। ऐसे में स्कूल कैसे जाएंगे और उनकी पढ़ाई कैसे होगी। गांव की पांचवीं कक्षा की उपासना का कहना है कि उनका घर भी आग की चपेट में आ गया है और मेरी सारी किताबें, कापियां, जूते और वर्दी भी सब जल गई हैं। अब मैं स्कूल कैसे जाऊंगी? छात्रा का कहना है कि उसे स्कूल जाने के लिए वर्दी, किताबें और काफियां चाहिए, ताकि मैं स्कूल जा सकूं। जबकि अभिभावकों का कहना है कि उसका सारा सामान घर के साथ जल गया है और स्कूली बच्चों की वर्दी-किताबें और कापियां भी जलकर राख हो गई हैं।

  • kullu-3आगजनी के गाहर अग्नि पीड़ित बच्चों की दास्तां
  • अभिभावकों ने जिला प्रशासन किया बच्चों को पाठ्य सामग्री देने का आग्रह

अब उनके पास बच्चों को स्कूल भेजने के लिए वर्दी और पाठय सामग्री नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनके बच्चों को वर्दी और पाठय सामग्री प्रदान की जाए, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई नियमित जारी रहे। उन्होंने बताया कि इस गांव में करीब 35 बच्चे हैं जो स्कूल में पढ़ते हैं।

ठिठुरती सर्दी में कैसे कटेगी अग्नि प्रभावित की रातें

खराहल घाटी के गाहर बिष्ट बहेड़ गांव में अग्निकांड के शिकार बने लोगों की चुनौती बढ़ चुकी है। अग्निकांड में  आशियाना अनाज और कपड़े सब कुछ जलकर ख़ाक हो चुके हैं। यहां तक की नोटबंदी के इस दौर में ये लोग पाई-पाई के लिए मोहताज़ हैं। प्रशासन की तरफ से तिरपाल और कंबल जरूर मुहैया कराए जा चुके हैं। लेकिन सर्द रात अधिकारियों के दिए तिरपाल पर भारी पड़ रही है। वहीं रक्षा देवी ने जानकारी देते हुए कहा कि उनके तीन बच्चे हैं। उनकी सबसे बड़ी चुनौती उनकी 9 महीने का बेटी है। तीन बच्चें है, जिन्हें रात को सुलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऊपर से तिरपाल भी ठंडी से बचाव के लिए काफी नहीं है। वे तो ठंड को झेल लेंगी, लेकिन उनका 9 महीने का मासूम कैसे झेल सकती है। इसके अलावा रुक्मणी और शिल्पा नाम की भी औरतों ने अपनी दर्द बयान किया।

kullu-1सांसद ने पांच लाख रुपये देने की घोषणा की

जिला की खराहल घाटी के बिष्ट बहेड़ गांव में आगजनी की घटना  से नौ घर जलने से 23 परिवारों के 92 लोग बेघर हो गए हैं। वहीं बीजेपी सांसद राम स्वरूप शर्मा लोकसभा की कार्रवाई छोड़कर वॉल्वो बस से कुल्लू पहुंचे और बिष्ट बहेड़ पहुंचे कर घटनास्थल का जायजा लिया और पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिया। सांसद राम स्वरूप शर्मा ने अग्नि प्रभावितों को सासद निधि से पीड़ितों को मकान निर्माण के लिए पांच लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने सभी प्रभावितों को मकान निर्माण के लिए वन विभाग से उचित मात्रा में लकड़ी मुहैया कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गांव में पानी के टैंकों का निर्माण होगा, ताकि भविष्य में पानी की जरूरतों पूरी हो सके।

उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली से पत्राचार के माध्यम से  अग्नि प्रभावितों को बैंक से उचित धन मुहैया कराने का निवेदन किया है, ताकि प्रभावित परिवारों को जरूरत के मुताबिक धन मिल सकें, जिससे मकान निर्माण के लिए कोई किसी प्रकार की परेशानियों का सामना ना करना पड़े। उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों के बैठक कर प्रभावितों के लिए हर संभव मदद समय पर मिले इसके लिए सभी विभागों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।

वहीं जिला प्रशासन की तरफ से अग्नि प्रभावितों को एक लाख 22 हजार की नकदी व 136 कंबल, 60 गद्दे, बैडशीट, पील्लो, 36 तिरपाल, 18 बर्तन कीट के साथ दो महीने का राशन दिया गया है और प्रभावित परिवारों को बिजली, पानी और रहने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, हिमाचल प्रदेश राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के संयोजक एवं पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष हरी चंद शर्मा ने अग्निकांड से प्रभावित गांव गाहर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जहां अग्नि प्रभावित परिवारों का दुख दर्द बांटा, वहीं लोगों से अपील की कि सभी लोग अपने-अपने घरों की इश्योरेंस जरूर करवाएं।

 

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