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अब शांता के बदले सुर, कांगड़ा में बनने चाहिए अलग जिले

अब शांता के बदले सुर, कांगड़ा में बनने चाहिए अलग जिले

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धर्मशाला। कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र से वर्तमान सांसद शांता कुमार पहले तो जिला कांगड़ा में नए संगठनात्मक जिले बनाने के हक में नहीं थे पर अब वे इसके समर्थन में हैं। असल कारण क्या हैं यह तो वही जाने पर अब वे इसे समय और विकास के लिए जरूरी मानते हैं। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान एक तरफ जहां बीजेपी कांगड़ा को तोड़कर चार जिले बनाने की घोषणाएं कर रही थी तो वहीं शांता कुमार खुलकर इसका विरोध करते रहे।

  • पहल करते थे विरोध अब भरी हामी 
  • सांसद बोले, समय और विकास को देखते यह जरूरी

kangraउस समय शांता का कहना था कि कांगड़ा जिला को तोड़ना किसी भी लिहाज से तर्कसंगत नहीं है और मैं इसका कभी समर्थन नहीं कर सकता, लेकिन अब शांता कुमार के सुर इस मसले पर बदले- बदले हैं। उनका कहना है कि यह समय की जरूरत है और विकास की दृष्टि से भी लाजिमी है। सनद रहे कि प्रदेश में सरकार के गठन में अहम रोल अदा करने वाले जिला कांगड़ा में शांता कुमार के नए जिलों के विरोध भरे रुख से, जिला में बीजेपी को करारी शिकस्त मिली थी और प्रेम कुमार धूमल का मिशन रिपीट का सपना धूमिल हो गया था।

बीजेपी नेता नए जिलों के गठन का दावा करके वोट मांगते रहे, लेकिन ऐन वक़्त पर शांता के विरोध ने बीजेपी के दावों को हवा-हवाई कर दिया। नए जिलों के गठन को लेकर उस समय बीजेपी ने जो लहर बनाई थी, शांता के विरोध के चलते वह लहर सुनामी बनकर बीजेपी की नैय्या डूबो गई। उन चुनावों में कांगड़ा जिला की 15 विधानसभा सीटों में से बीजेपी सिर्फ 3 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई थी। जिला से कैबिनेट मंत्री किशन कपूर और रमेश धवाला भी चुनाव हार गए थे। शांता कुमार के चहेते पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीण शर्मा और बीजेपी के संगठनात्मक जिला के अध्यक्ष विनय शर्मा और शांता-धूमल दोनों के खासम खास सुलह के पूर्व विधायक विपिन सिंह परमार ने हाल ही में एक संयुक्त बयान में भी कहा है कि बीजेपी 2017 विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में पालमपुर  को जिला का दर्ज़ा दिलवाएगी। अब शांता कुमार ने भी इसपर हामी भर दी है।

 bjp-logoशांता कुमार का कहना है कि अगर सभी पार्टियां यह चाहती हैं कि कांगड़ा को तोड़ कर अलग-अलग जिला बने तो उन्हें इस से अब कोई ऐतराज़ नहीं है। शांता कुमार का कहना है कि यह समय की मांग है और इस से विकास की गति बढ़ेगी तथा केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों के उचित कार्यान्वयन के लिए यह कारगर कदम होगा।  शांता कुमार के इस बदलाव को ऐसे भी देखा जा सकता है कि कुछ समय पूर्व प्रदेश के सीएम वीरभद्र सिंह ने जब पालमपुर का दौरा किया था तो उन्होंने कहा था जनता अगर यह चाहती है तो उनकी इन भावनाओं की कदर करते हुस इस पर विचार किया जा सकता है और इस के लिए वह पार्टी के लोगों की राय भी ले सकते हैं। अगर कांग्रेस कांगड़ा को तोड़ कर अलग जिला बनाने की घोषणा करती है तो उन्हें इस का राजनीतिक फायदा मिल सकता है।

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