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सांसद Delhi में उठाएंगे ट्रांसगिरी क्षेत्र का मामला

सांसद Delhi में उठाएंगे ट्रांसगिरी क्षेत्र का मामला

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शिमला।  शिमला संसदीय हलके के सांसद विरेंद्र कश्यप सिरमौर जिले के संपूर्ण ट्रांसगिरी क्षेत्र की आवाज को और धार देंगे। वे सिरमौर जिले से ताल्लुक रखने वाले सभी जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर दिल्ली में केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुयल ओराम से मिलेंगे। इस मुलाकात में वे ट्रांसगिरी क्षेत्र के उन सभी इलाकों को जनजातीय श्रेणी में शामिल करने की मांग करेंगे, जिन्हें राज्य सरकार के प्रस्ताव में बाहर किया गया है। 12 दिसंबर को दिल्ली में ओराम से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में जिले के विधायक, पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधि और अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि विशेष रूप से शामिल होंगे।

  • virender-kashyapजनप्रतिनिधियों के साथ दिल्ली में केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री से मिलेंगे
  • राज्य सरकार ने नई रिपोर्ट में 25 पंचायतों को जनजातीय क्षेत्र के प्रस्ताव से बाहर किया

सांसद विरेंद्र कश्यप का आरोप है कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को सौंपी अपनी नई रिपोर्ट में राजगढ़ और पांवटा साहिब तहसील की 25 पंचायतों को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव से बाहर कर दिया है। उनका कहना है कि वास्तविक्ता यह है कि इन 25 पंचायतों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली, रहन-सहन, लोक संस्कृति और भौगोलिक परिस्थितियां पूरी तरह से ट्रांसगिरी क्षेत्र से मिलती हैं।

उन्होंने कहा कि पांवटा और राजगढ़ की 25 पंचायतें भी इस श्रेणी में शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पांवटा साहिब और राजगढ़ की 25 पंचायतों को प्रस्तावित जनजातीय क्षेत्र के प्रस्ताव से हटाने से इन क्षेत्रों के साथ पूरी तरह भेदभाव होगा और यह समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा। कश्यप ने कहा कि उन्होंने संपूर्ण ट्रांसगिरी क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने के लिए बार-बार संसद में मांग उठाई है। इसके साथ-साथ कई संवैधानिक और अन्य मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया था।

  • प्रस्ताव से हटाने से को वीरेंद्र कश्यप से बताया भेदभाव
  • कहा, यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है

इसके बाद ही केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने त्रुटिपूर्ण और अधूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य के जौनसार-बावर क्षेत्र को 1967 में जनजातीय क्षेत्र घोषित किया गया था, ट्रांसगिरी क्षेत्र को आज तक यह दर्जा नहीं मिला है। जबकि राजशाही के दौर में जौनसार-बावर और ट्रांसगिरी क्षेत्र सिरमौर रियासत का ही अंग था और दोनों क्षेत्रों में पूरी तरह समानताएं हैं। इसलिए पूरे ट्रांसगिरी क्षेत्र को जौनसार-बावर क्षेत्र की तर्ज पर जनजातीय क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए।

गौर हो कि ट्रांसगिरी क्षेत्र में कुल 124 पंचायतें आती हैं और इनकी करीब 2.50 लाख की आबादी है। इसमें सिरमौर जिले की चार विधानसभा सीटें आती हैं और इनमें से शिलाई, रेणुका, राजगढ़ और पांवटा की पंचायतें शामिल हैं, लेकिन राज्य सरकार ने राजगढ़ और पांवटा साहिब की 25 पंचायतों को जनजातीय दर्जा देने वाले प्रस्ताव से बाहर किया है। इसी मुद्दे को अब सांसद विरेंद्र कश्यप दिल्ली दरबार में उठाने जा रहे हैं और इसके लिए उन्होंने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी लामबंद कर दिया है।

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