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किसानों के लिए मील का पत्थर सिद्ध हो रही है “ये” योजना

किसानों के लिए मील का पत्थर सिद्ध हो रही है “ये” योजना

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जंगली व लावारिस पशुओं (Animals) के आतंक से परेशान जिला ऊना (District Una) के किसानों के लिए मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना (Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana) मील का पत्थर सिद्ध हो रही है। इस योजना का लाभ लेकर गगरेट ब्लॉक की ग्राम पंचायत बड़ोह के 116 किसान परिवार दोबारा से किसानी की राह पर चल पड़े हैं। पावरा गांव में जानवरों के आतंक के चलते पहले यह किसान खेती से मुंह मोड़ चुके थे।


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पावरा के कृषकों ने कृषि विभाग के सहयोग से सामूहिक तौर पर 12 हेक्टेयर भूमि पर सौर बाड़ लगाकर बाड़बंदी की, जिसके बाद वह अब यहां पर मक्की व सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। पावरा में सौर बाड़बंदी का कुल खर्च लगभग 47 लाख रुपए आया, जिसमें से 7 लाख रुपए का योगदान किसानों ने किया जबकि 40 लाख रुपए उन्हें सब्सिडी के तौर पर मिले।

 

कृषि विभाग ने जिला ऊना में वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के अंतर्गत 42, जबकि 2018-19 में 63 तथा वर्ष 2019-20 में अब तक 9 यूनिट लगाई है, जिससे 800 से अधिक किसान परिवारों को लाभ पहुंचा है। विभाग ने वर्ष 2017-18 के दौरान सौर बाड़ लगाने पर 1.14 करोड़ रुपए, वर्ष 2018-19 में 2.39 करोड़ रुपए तथा वर्ष 2019-20 में अब तक लगभग 91 लाख रुपए खर्च किए।

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इस योजना के अंतर्गत किसानों के खेत के चारों ओर बाड़ लगाई जाती है, ताकि जानवर खेत के अंदर दाखिल होकर फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें। बाड़ को सोलर लाइट के माध्यम से संचालित किया जाता है और इसे चलाने में बिजली का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे पैसों की बचत होती है। सौर बाड़ में हल्का सौर आधरित करंट होता है और जैसे ही कोई जानवर तार के संपर्क में आता है तो उसे हल्का करंट लगता है, जिससे जानवर भाग जाता है। करंट हल्का होने के चलते इंसान के इसके संपर्क में आने से उसको किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता।

मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के अंतर्गत लाभ लेने के लिए इच्छुक किसानों को कृषि विभाग से संपर्क करना होता है। किसान से एक फॉर्म भरवाया जाता है तथा उसके साथ भूमि की जमाबंदी तथा नक्शा देना आवश्यक है। सभी दस्तावेज़ों को जमा करवाने के बाद कृषि विभाग बाड़ लगाने के लिए ज़रूरी प्रक्रिया आरंभ करता है।

इस योजना के अंतर्गत किसानों को सोलर फेंसिंग कराने के लिए प्रदेश सरकार सब्सिडी भी प्रदान करती है। अगर आवेदक तीन से कम किसान हों तो 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है और अगर किसान तीन से ज्यादा संख्या में सामूहिक तौर पर आवेदन करते हैं तो 85 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है। यानी किसानों को सिर्फ 15 प्रतिशत राशि ही देनी पड़ेगी।

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