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बीमार तो नहीं बना रही हैं मल्टीटास्किंग आप को

बीमार तो नहीं बना रही हैं मल्टीटास्किंग आप को

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विज्ञान व तकनीक के इस दौर में अगर किसी भी चीज के फायदे हैं तो नुकसान भी कम नहीं हैं। वैसे तो आज के दौर में मल्टी टास्किंग एक वरदान बन चुकी है पर हमारी सेहत पर भी इसका उल्टा असर पड़ रहा है उसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मल्टीटास्किंग से होने वाली समस्याओं को बेशक अभी हम हल्के में ले रहे हैं लेकिन आने वाले समय में इस से परिणाम भयावह हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि मल्टी टास्कर्स कौन सी समस्याओं के शिकार हो सकते हैं।

एक रिसर्च के अनुसार लेक्चर के दौरान दूसरे काम में दिमाग़ लगा होने का असर रिज़ल्ट पर पड़ता है। जब क्लास रूम में किसी एक बच्चे का दिमाग़ डाइवर्ट होता है (चाहे वह कंप्यूटर के कारण हो या मोबाइल के कारण) तो उसके साथ उसके आसपास के बच्चे भी प्रभावित होते हैं। सेलफ़ोन पॉलिसी ए रिव्यू ऑफ़ विहेवियर फ़ैकल्टी स्टैंड्स के हालिया आंकड़ों पर नज़र डालें तो स्थिति एकदम साफ़ हो जाती है, जिसमें बताया गया है कि एक बड़ा प्रतिशत ऐसे बच्चों का है, जो पर्याप्त सुविधा के बावजूद पढ़ाई में ख़राब स्कोर कर रहे हैं। क्योंकि 90 फीसदी छात्र क्लास के दौरान फ़ोन चलाते हैं। 32 फीसदी स्वीकार करते हैं कि टीचर की पकड़ में आए बिना वे चैटिंग करते हैं। 56 फीसदी ने माना कि स्कूल में फ़ोन बैन होने के बावजूद वे इसका इस्तेमाल करते हैं।

हाल ही में हुए एक शोध के परिणाम कहते हैं कि मीडिया मल्टीटास्कर्स के दिमाग़ में धीरे-धीरे ग्रे मैटर कम होता जाता है। इनकी बौद्धिक नियंत्रण क्षमता, भावनाओं पर पकड़ और इच्छा-शक्ति की हमी इनमें देखी जा सकती है। 2016 में हुए एक अध्ययन से यह बात सामने आई कि क्रॉनिक मीडिया मल्टीटास्कर्स की वर्किंग मेमरी यानी किसी काम के दौरान संबंधित जानकारियों को याद रखने की क्षमता और लॉन्ग-टर्म मेमरी यानी घटनाओं, जानकारियों को लंबे समय तक याद रखने की क्षमता कमज़ोर बन जाती है।

एक शोध के दौरान शोधार्थियों ने सात दिन तक मल्टीटास्किंग करने वाले कुछ लोगों के घर पर रहकर उनका अध्ययन किया और पाया कि जो व्यक्ति जितना ज़्यादा मल्टीटास्क करता था, उसकी मनःस्थिति उतनी ही अधिक भ्रमित थी। एक सीमा के बाद इस भ्रम को इस हद तक बढ़ता देखा गया कि वे ज़रूरी और गैर ज़रूरी काम में ही अंतर कर पाने में फ़ेल होने लगे।

पिछले दिनों जब न्यूयॉर्क शहर में क़रीब 1400 पैदल यात्रियों के कार से दुर्घटना-ग्रस्त होने के पीछे के कारणों की जांच की गई, तो उसके पीछे भी मल्टीटास्किंग का जुनून पाया गया। जांच से पता चला कि 10 फीसदी वयस्कों की तुलना में 20 फीसदी टीनएज बच्चे पैदल चलते हुए दुर्घटना का शिकार हुए, क्योंकि उनका ध्यान मोबाइल डिवाइस में लगा हुआ था।

आम तौर पर हम करते हैं कि स्मार्टफ़ोन ने दूरियों को कम किया है लेकिन सच तो यह है कि स्मार्टफ़ोन से संबंध सुधरने के बजाय बिगड़ रहे हैं। अनुसंधान की भाषा में इस समस्या को टेक्नोफ्रेंकेस नाम दिया गया है, जिसका आशय उन दंपत्तियों से है जिनके रिश्ते में टेक्नोलॉजी के कारण दीवार खड़ी हो गई है।

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