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न सबलेटिंग करें, न निगम की दुकानों पर कुंडली मारें

न सबलेटिंग करें, न निगम की दुकानों पर कुंडली मारें

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धर्मशाला। स्मार्ट सिटी के साथ नए जुड़े क्षेत्रों से कर तभी लिया जाएगा जब उन्हें सारी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। नगर निगम धर्मशाला अपनी आय बढ़ाने के लिए शहर का सर्वे करवाएगा, ताकि सही ढंग से गृह और संपत्ति कर निर्धारित किया जाए। शहर के जो लोग कर के दायरे में हैं वह ईमानदारी के साथ अपना कर अदा करें। धर्मशाला में पत्रकार वार्ता के दौरान नगर निगम आयुक्त व  स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के सीईओ कैप्टन जेएम पठानिया ने कहा कि निगम की दुकानों की सबलेटिंग की भी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के सीईओ बोले, नए क्षेत्रों को पहले सुविधाएं देंगे, फिर लेंगे कर

किसी तरह की सबलेटिंग बर्दाश्त नहीं होगी और निगम की दुकानों पर कुंडली मारकर बैठे लोगों द्वारा अवैध रूप से किए गए कब्जों को छुड़वाया जाएगा।पठानिया ने कहा कि नगर निगम को आमदनी का भी जरिया चाहिए इसलिए सबसे बड़ा साधन संपत्ति कर है। पूरे नगर निगम से संपत्ति कर अभी तक वसूला नहीं गया है।

gafoor2चुनौतीपूर्ण हैं अगले पांच साल

पठानिया कहा कि नगर निगम को मॉडल बनाने के लिए हम प्रयासरत हैं लेकिन जनभागिता के बिना यह कतई संभव नहीं है। एक रात में बदलाव नहीं हो सकता बल्कि इसके लिए सतत और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। पठानिया ने कहा कि धर्मशाला स्मार्ट सिटी नहीं है बल्कि इसका चयन स्मार्ट सिटी बनाने के लिए हुआ है और आगामी 5 वर्ष बहुत चुनौतिपूर्ण हैं। हमें लगातार मेहनत करके इस सपने को साकार करना है।

पठानिया ने कहा कि बेतरतीब तरीके से हुए निर्माण से हमने कई शहरों का स्वरूप बिगाड़ दिया है। धर्मशाला शहर के लोग इस मामले में खुशनसीब हैं कि यह शहर अभी अव्यवस्थित नहीं हुआ है। इसलिए इस शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए शहरवासी पूर्ण सहयोग देकर इसे भविष्य की धरोहर बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण किसी भी शहर को बदसूरत बना देता है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वह अतिक्रमण को बढ़ावा न दें। एक सड़क या गली तारकोल या कंक्रीट से स्मार्ट नहीं बन सकती बल्कि स्मार्ट सड़क वह होती है जहां बिना किसी बाधा के लोग गुजर सकें। एक व्यक्ति द्वारा किया गया अतिक्रमण हजारों लोगों को परेशान कर सकता है, लेकिन स्मार्ट सिटी के प्रारूप में ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। स्मार्ट सिटी एक तय प्रारूप के तहत विकसित होनी है इसलिए शहरवासी अपने आवासों का निर्माण निर्धारित मानकों के आधार पर ही करें।

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