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नगर निगम शिमला का बजट घटकर हुआ 297 करोड़, स्कूल टॉपर्स को देंगे लैपटॉप

नगर निगम शिमला का बजट घटकर हुआ 297 करोड़, स्कूल टॉपर्स को देंगे लैपटॉप

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शिमला। नगर निगम शिमला (Municipal Corporation Shimla) की मेयर कुसुम सदरेट ने वर्ष 2019-20 के लिए 297 करोड़ रुपए का बजट (Budget) पेश किया।  महापौर कुसुम सदरेट ने अपने बजट भाषण में शहर वासियों को कई नई योजनाएं समर्पित की। जिनमें से निगम रसोई सेवा योजना भी एक है । योजना के अंतर्गत शिमला के तीनों सरकारी अस्पताल आईजीएमसी, केएनएच और रिपन अस्पताल में इलाज के लिए पहुचने वाले लोगों को निगम फ्री में खाना देगा। वहीं, नगर निगम ने बजट में गौ संरक्षण केंद्र बनाने की प्रस्तावना भी है जिसके माध्यम से नगर निगम अपने गौ सदन बनाएगी। बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नगर निगम फिर से स्वास्थ्य सेवा प्रयोगशाला का आरंभ किया जाएगा जिसमें वृद्ध लोगों और महिलाओ को स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएगी।बजट में नगर निगम को ई विधान प्रणाली से जोड़ने का भी प्रस्ताव है ऐसा करने वाला निगम देश का पहला नगर निगम होगा जहां निगम को पेपर लैस किया जाएगा। बजट में निगम की परिधि में आने वाले सरकारी स्कूलों में 10वीं और 12वीं में प्रदेश स्तर पर टॉप करने वाले छात्र को नगर निगम लैपटॉप देगी।

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बजट ( Budget) में सड़कों निगम के भवनों,पार्किंग,नाले नालियों के निर्माण,जल वितरण और सीवरेज लाइन बिछाने, स्ट्रीट लाइट लगवाने, कार्यालय के लिए फर्नीचर एवं सामग्री खरीद के लिए 2390.50 लाख का बजट का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2019.20 में नगर निगम की आय 12174.41 लाख रुपये अनुमानित हैं।नगर निगम शिमला को ग्रीन फीस से 15 करोड़ की आय की संभावना है। इसी तरह से टूटीकंडी पार्किंग से 12 करोड़ की आय का अनुमान लगाया गया है। नगर निगम में बजट में नया टाउन हॉल बनाने की बात कही गई है जबकि पुराना टाउन को बचाने में निगम विफल ही हो गया है। नगर निगम का बजट इस बार पिछले बजट से लगभग 58 करोड़ कम है जिसकी वजह निगम से अलग होकर जल प्रबंधन निगम बनने को बताया गया है।

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उधर ,कांग्रेस ( Congress) और सीपीआईएम के पार्षदों ने बजट को घाटे का बजट करार दिया है और कहा है कि बजट में कुछ भी नया नहीं है। महापौर ने 2017 की बजट की योजनाओं को ही फिर से बताया है। 2017 के बजट की योजनाएं भी अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई हैं। बजट से शिमला शहर कि जनता पर बोझ पड़ेगा। निगम के आय के साधन भी कम हो गए है। बजट में नशे के बढ़ते प्रचलन पर रोक लगाने के लिए कुछ भी प्रावधान नही किया गया है। महिला सशक्तीकरण के लिए पिछले बजट में 50 लाख खर्च करने कि बात कही गई थी उसमे से एक भी पैसा निगम नही खर्च पाई है।

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