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जानें हिंदू धर्म की दस पवित्र ध्वनियों के बारे में

जानें हिंदू धर्म की दस पवित्र ध्वनियों के बारे में

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ईश्वरीय पूजाक्रम में कई तरह के वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है…। वाद्य यंत्रों की ध्वनि से मंदिरों का वातावरण मधुर एवं पवित्र रहता है। हिन्दू धर्म में संगीत मोक्ष प्राप्त करने का एक साधन है। संगीत से हमारा मन और मस्तिष्क पूर्णत: शांत और स्वस्थ हो सकता है। भारतीय ऋषियों ने ऐसी सैकड़ों ध्वनियों को खोजा, जो प्रकृति में पहले से ही विद्यमान है। उन ध्वनियों के आधार पर ही उन्होंने मंत्रों की रचना की, संस्कृत भाषा की रचना की और ध्यान में सहायक ध्यान ध्वनियों की रचना की। हमारे यहां क्रम में दस ध्वनियों को पवित्र माना गया है जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं …

मंदिर की घंटीः जिन स्थानों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती है, वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। इससे नकारात्मक शक्तियां हटती हैं तथा समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
शंख : शंख को नादब्रह्म और दिव्य मंत्र की संज्ञा दी गई है। शंख सूर्य व चंद्र के समान देवस्वरूप हैं जिसके मध्य में वरुण, पृष्ठ में ब्रह्मा तथा अग्र में गंगा और सरस्वती नदियों का वास है। कहते हैं शंख की ध्वनि जितनी दूर तक जाती है उतनी दूर तक आसुरी शक्तियों का प्रभाव नहीं रहता।
बांसुरी : बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अतिप्रिय है। जिस घर में बांसुरी रखी होती है वहां के लोगों में परस्पर प्रेम तो बना रहता है, साथ ही सुख-समृद्धि भी बनी रहती है।
वीणा : वीणा एक ऐसा वाद्य यंत्र है जिसका प्रयोग शास्त्रीय संगीत में किया जाता है। वीणा शांति, ज्ञान और संगीत का प्रतीक है।
मंजीराः इसे आसानी से कहीं भी भजन-कीर्तन में बजते देखा-सुना जा सकता है।
खड़तालः भजन और कीर्तन में उपयोग किया जाना वाला यंत्र है। इसका आकार धनुष की तरह होता है।
पुंगी या बीन : यह वाद्य यंत्र भी भारत में प्राचीनकाल से ही प्रचलित है। अक्सर यह सपेरों के पास देखा जाता है।
नगाड़ा : नगाड़ा प्राचीन समय से ही प्रमुख वाद्य यंत्र रहा है। इसे बजाने के लिए लकड़ी की डंडियों से पीटकर ध्वनि निकाली जाती है। वास्तव में नक्कारा, नगारा या नगाड़ा संदेश प्रणाली से जुड़ा हुआ शब्द है।
मृदंग : यह दक्षिण भारत का एक थाप यंत्र है। कर्नाटक संगीत में इसका ताल यंत्र के रूप में उपयोग होता है। बहुत ही मधुर आवाज के इस यंत्र का इस्तेमाल गांवों में कीर्तन गीत गाने के दौरान किया जाता है। मृदंग का एक सिरा काफी छोटा और दूसरा सिरा काफी बड़ा (लगभग 10 इंच) होता है। वहीं, ढोलक भी अक्सर मांगलिक कार्यों के दौरान बजाया जाता है।
डमरू : डमरू या डुगडुगी एक छोटा संगीत वाद्य यंत्र होता है। डमरू का हिन्दू, तिब्बती व बौद्ध धर्म में बहुत महत्व माना गया है। भगवान शंकर के हाथों में डमरू को दर्शाया गया है। साधु और मदारियों के पास अक्सर डमरू मिल जाएगा।


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