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घरेलू हिंसा एक्ट : मुस्लिम महिलाओं को भी गुजारा भत्ते का हक, हाईकोर्ट का फैसला 

घरेलू हिंसा एक्ट : मुस्लिम महिलाओं को भी गुजारा भत्ते का हक, हाईकोर्ट का फैसला 

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मुंबई। घरेलू हिंसा एक्ट के तहत अब मुस्लिम महिलाएं भी गुजारा भत्ते का दावा कर सकती हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को यहां के एक मुस्लिम युवक की याचिका खारिज करते हुए उसे अपनी पत्नी और दो बच्चों के लिए 1.05 लाख रुपये का मासिक भत्ता और घर का किराया देने का आदेश दिया है। फैमिली कोर्ट ने भी यही फैसला दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।
याचिका में युवक ने दावा किया था कि दंपती इस्लामिक अलवी बोहरा समुदाय के ताल्लुक रखते हैं, जो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अधीन है इसलिए घरेलू हिंसा निषेध कानून उन पर लागू नहीं होता। इसके जवाब में हाईकोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा एक्ट मुस्लिम महिलाओं को इसके दायरे से अलग नहीं करता। कोर्ट ने कहा कि कोई शख्स अगर पत्नी को तीन तलाक देने के बाद दूसरा निकाह कर लेता है तो भी वह अपनी पहली पत्नी के प्रति जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकता। दंपती की शादी 1997 में हुई थी और दोनों के दो बच्चे भी हैं। 2015 में महिला ने क्रूरता का आरोप लगाते हुए शादी रद्द करने के लिए फैमिली कोर्ट में अर्जी दी थी। 2017 में कोर्ट ने आदेश दिया था कि व्यक्ति को अपनी पत्नी और बच्चों के लिए मासिक भत्ते के रूप में 65 हजार रुपये और घर के किराये के लिए 40 हजार रुपये देने होंगे। हाईकोर्ट ने भत्ते की रकम बढ़ाकर 1.05 लाख रुपए कर दी है।

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