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इस गांव में आज भी गूंजती हैं चूड़ियों की खनक…

इस गांव में आज भी गूंजती हैं चूड़ियों की खनक…

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कुलधरा एक ऐसा गांव है जो सदियों से निर्जन और वीरान पड़ा है। यहां कोई बसने नहीं गया और अगर गया भी तो वह जीवित नहीं बचा। जैसलमेर से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर है कुलधरा गांव। इस गांव की स्थापना 1291 में हुई थी। तब यहां 600 घर थे। यहां के पालीवाल ब्राह्मण बहुत मेहनती और रईस थे। उन्होंने इस गांव को एकदम वैज्ञानिक आधार पर बसाया था। गर्मी का मौसम हो, तो भी ईंट पत्थरों के बने इन मकानों में जरा भी गर्मी का एहसास नहीं होता। हवाएं सीधे-सीधे घर के अंदर से होकर गुजरती हैं। इसके अलावा यहां के तमाम घर ऐसी वास्तु शैली का प्रयोग कर बनाए गए थे कि वे झरोखों के जरिए एक दूसरे से जुड़े हुए थे, वह भी कुछ इस तरह कि बात एक सिरे से दूसरे सिरे तक आसानी से पहुंचाई जा सकती थी। घरों के अंदर पानी के कुंड, सीढिय़ां और सजावटी ताक सभी कमाल के हैं। पालीवाल ब्राह्मणों की मेहनत रंग लाई। बहुत जल्दी ही यह क्षेत्र फला-फूला और 80 गांवों के दायरे में फैल गया।

kuldhara-11यहां 1500 परिवारों के घर आबाद थे फिर एक दिन अचानक ही जाने क्या हुआ कि बिना किसी सूचना या शिनाख्त के, सारा गांव खाली हो गया। यहां रहने वाले यह गांव छोड़ कर चले गए। आज यह गांव लगभग दो सदियों से वीरान पड़ा है। कहते हैं कि शासकों ने गांव वालों पर जरूरत से ज्यादा ही टैक्स डाल दिया था, साथ ही एक बुरे दीवान की नजर गांव की एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गई। उसे पाने के लिए वह ब्राह्मणों पर दबाव बनाने लगा कि अगर उसे लड़की नहीं मिली तो वह गांव पर हमला करके उसे उठा ले जाएगा। रोज के डराने, धमकाने से गांव वालों के सामने यह मुश्किल खड़ी हो गई कि वे लड़की बचाएं या गांव। वे सभी मंदिर पर एकत्र हुए और फैसला लिया गया कि कुछ भी हो वे दीवान को लड़की नहीं देंगे। उन लोगों ने विवश होकर गांव खाली कर दिया।

kuldhara-3पूरे पंद्रह सौ परिवार यहां रहते थे और अचानक ही एक रात वे गायब हो गए। न तो वे मारे गए थे और न ही उनका अपहरण किया गया था, वे बस कहीं चले गए थे। लड़की का सम्मानित पिता भी सबके साथ गांव छोड़ गया। जो भी कारण रहा हो, पर यह तय था कि यहां रहने वाले बड़ी ही विवशता में दु:खी होकर घर छोड़ कर चले गए थे। जाते-जाते उन्होंने श्राप दिया था कि इस धरती पर कोई भी बस नहीं सकेगा। यह श्राप आज भी कायम है इस धरती पर जिसने भी रहने के लिए कदम रखा, उसकी दर्दनाक मौत हुई। धीरे-धीरे लोगों ने यहां आना भी छोड़ दिया और यह गांव वीरान हो गया। कुलधरा खूबसूरत है पर इस गांव की वीरानी को देख कर दु:ख होता है। आज यह गांव लगभग दो सदियों से वीरान है और कहा जाता है कि पूरे गांव पर रुहानी ताकतों का कब्जा है। आज भी रात के अंधेरे में यहां रहने वाले लोगों की आहटें, बच्चों के हंसने-खिलखिलाने की आवाजें सुनाई देती हैं। रात को बाजारों में अजीब सी चहल-पहल सी लगती है। महिलाओं की पायलों की रुनझुन…चूडिय़ों की खनक और उनके हंसने की आवाजें सुनने वाले को चौंका देती हैं।

kuldhara-6काफी लोगों का विश्वास रहा है कि इस गांव में पालीवाल ब्राह्मणों का काफी सोना-चांदी दबा हुआ है इसलिए कुछ लोगों ने यहां आकर खुदाई भी की, पर हासिल कुछ नहीं हुआ। पराशक्तियों पर रिसर्च करने वाली एक टीम भी यहां आई । इस टीम के सदस्यों का कहना था कि यहां कुछ न कुछ अजीब जरूर है और ज्यादातर घरों में नकारात्मक ऊर्जा का क्षेत्र बन गया है। उनमें से एक ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कई बार मुझे लगा कि किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा, जैसे मुझसे कुछ कहना चाह रहा हो। यह भी लगा कि वहां से गुजरती हवाओं के साथ वे धीमी आवाजों में अपना नाम ले रहे थे। आज भी इस गांव में जाने से लोग दहशत में रहते हैं। कहा जाता है कि रात में यहां अजीबोगरीब गतिविधियां दिखाई देती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जो लोग यहां आकर अस्वाभाविक मौत मरे हैं उनकी भी भटकती आत्माएं लोगों को परेशान करती हैं। अब यह बात सच हो या झूठ पर आज तक यह गांव आबादी से खाली है और आगे भी यहां लोग बसने आएंगे इसकी कोई उम्मीद नहीं है।

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