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13 साल बाद SC कॉलेजियम में शामिल हुईं महिला जज, निर्भया केस में सुना चुकी हैं फैसला

निर्भया गैंगरेप केस में अलग से लिखा था अपना निर्णय

13 साल बाद SC कॉलेजियम में शामिल हुईं महिला जज, निर्भया केस में सुना चुकी हैं फैसला

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) में 13 साल बाद रविवार को किसी महिला सदस्य को शामिल किया गया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) के रिटायरमेंट के बाद अब जस्टिस आर. भानुमति (R. Bhanumathi) कॉलेजियम का हिस्सा बन गई हैं। उनसे पहले, लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में सेवा देने वाले न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति रूमा पाल कॉलेजियम प्रणाली का तीन साल तक 4 जून, 2006 को सेवानिवृत्त होने तक इसका हिस्सा रहीं। जिसके बाद अब जाकर जस्टिस भानुमति को सुप्रीम कोर्ट की 5वीं सीनियर मोस्ट जस्टिस होने के नाते कॉलेजियम का हिस्सा बनाया गया है।


न्यायमूर्ति भानुमती, तमिलनाडु से हैं। 20 जुलाई 1955 को जन्मी भानुमति का वर्ष 1988 में तमिलनाडु हायर जूडिशियल सर्विसेज में सीधा चयन हुआ। राज्य के कई जिलों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में काम करने के बाद तीन अप्रैल 2003 को उन्हें मद्रास हाई कोर्ट के जज के रूप में प्रोन्नति मिली। इस दौरान उन्होंने जल्लीकट्टू केस की सुनवाई की थी। करीब दस साल बाद साल 2013 में उन्हें झारखंड हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। अगस्त 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया।

उनके नाम की संस्तुति तबके सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मल लोढ़ा ने की थी। आर. भानुमति दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया गैंगरेप केस का फैसला सुनाने वाली पीठ का हिस्सा थीं। इस मामले में अपना निर्णय अलग से लिखते हुए उन्होंने इस केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना था। उनका मानना था कि ऐसे अपराध के लिए दूसरा कोई दंड नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी एक केस में मौत की सजा सुनाई जा सकती है तो ये वही केस है।

 

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