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विजयादशमी पर #Punjab में जलाया गया PM मोदी का पुतला; नड्डा ने बताया राहुल निर्देशित ड्रामा!

नड्डा बोले- निराशा और बेशर्मी का मेल खतरनाक होता है, कांग्रेस में यह दोनों ही हैं

विजयादशमी पर #Punjab में जलाया गया PM मोदी का पुतला; नड्डा ने बताया राहुल निर्देशित ड्रामा!

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चंडीगढ़। पंजाब (Punjab) में विजयादशमी के मौके पर रावण के पुतले को पीएम नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का मुखौटा पहनाकर कर जलाया गया। जिसके बाद अब इस मसले को लेकर सियासत का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (JP Nadda) ने सोमवार को इस घटना को राहुल गांधी निर्देशित ड्रामा करार दिया। उन्होंने कहा कि ये घटना शर्मनाक तो है लेकिन अनापेक्षित नहीं। इसके साथ ही उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार पर कभी भी प्रधानमंत्री कार्यालय की इज्जत ना करने का आरोप लगाया। नड्डा ने कांग्रेस और गांधी परिवार को अपने निशाने पर लेते हुए कहा कि निराशा और बेशर्मी का मेल खतरनाक होता है। कांग्रेस में यह दोनों ही हैं। माता द्वारा शालीनता और लोकतंत्र की खोखली बयानबाजी की जाती है। वहीं बेटा नफरत, क्रोध, झूठ और आक्रामकता की राजनीति के जीवंत प्रदर्शनों का पूरक है। इसमें दोयम दर्जे की बहुतायत है।

नेहरू-गांधी परिवार ने कभी भी पीएम के कार्यालय का सम्मान नहीं किया

बीजेपी अध्यक्ष ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि राहुल गांधी के निर्देश पर पंजाब में पीएम मोदी का पुतला जलाने का नाटक शर्मनाक है लेकिन अप्रत्याशित नहीं है। आखिरकार, नेहरू-गांधी परिवार ने कभी भी पीएम के कार्यालय का सम्मान नहीं किया है। यह 2004-2014 में यूपीए के वर्षों के दौरान पीएम के अधिकार वाली संस्था के  कमजोर होने के तौर पर देखा गया था। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई एक ऐसी पार्टी है, जिसका आचरण घृणा का पात्र है, तो वह कांग्रेस है। राजस्थान में एससी-एसटी समुदायों पर अत्याचार चरम पर हैं, राजस्थान के अलावा पंजाब में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। पंजाब के मंत्री छात्रवृत्ति घोटाले कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: महबूबा के ‘तिरंगा बयान’ से खफा हुआ उन्हीं की पार्टी के नेता: 3 ने दिया इस्तीफा, NC ने भी किया किनारा

नड्डा ने आगे कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पर, कांग्रेस कभी भी दूसरों पर दबाव नहीं बना सकती। उन्होंने दशकों तक असंतुष्ट आवाजों को दबाया है। हमने आपातकाल के दौरान इसकी झलक देखी है। बाद में, राजीव गांधी की सरकार ने प्रेस की आजादी को कमजोर करने का प्रयास किया। दबाव मुक्त प्रेस कांग्रेस को चुभती है।

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