अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आपका नजरिया दुनिया का नहीं, जमीन के सबूत दिखाएं

रामलला की तरफ से वकील एससी वैद्यनाथन ने रखी अपनी दलील

अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आपका नजरिया दुनिया का नहीं, जमीन के सबूत दिखाएं

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नई दिल्ली। अयोध्या रामजन्म भूमि– बाबरी मस्जिद विवाद (Ayodhya Ramjanmabhoomi-Babri Masjid dispute) की रोजाना सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान से जमीन पर कब्जे के सबूत पेश करने को कहा है। संविधान पीठ ने कहा कि आप सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे को नकार रहे हैं, आप अपने दावे को कैसे साबित करेंगे। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आपका दुनिया देखने का नजरिया सिर्फ आपका नजरिया है लेकिन आपके देखने का तरीका सिर्फ एक मात्र नजरिया नहीं हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि एक नजरिया ये है कि स्थान खुद में ईश्वर है और दूसरा नजरिया ये है कि वहां पर हमें पूजा करने का हक मिलना चाहिए। हमें दोनों को देखना होगा।


जिसका जवाब देते हुए रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये ऐतिहासिक तथ्य है कि लोग बाहर से भारत आए थे और उन्होंने मंदिरों को तोड़ा था। इतिहास की कुछ रिपोर्ट्स में ये भी जिक्र किया जाता है कि ब्रिटिश काल में हिंदुओं को बाहर रखने के लिए एक दीवार बनाई गई थी। किसी भी रिपोर्ट में वहां पर नमाज किए जाने का जिक्र नहीं है। अगर हिंदुओं ने पूजा के लिए स्थल बनाया और उसे तोड़ने का आदेश हुआ। लेकिन हमें इनकी जानकारी नहीं है। मुसलमानों के द्वारा वहां पर नमाज़ किए जाने का तथ्य 1528 से 1855 तक नहीं है। हाईकोर्ट ने भी इस मामले का जिक्र किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा रामलला का जन्मस्थान कहां है? जवाब मिला- बाबरी मस्जिद के गुंबद के नीचे

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने पूछा कि रामलला का जन्मस्थान कहां है? जिसका जवाब देते हुए रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बाबरी मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे वाले स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान माना है। वकील के मुताबिक मुस्लिम पक्ष (Muslim side) की तरफ से विवादित स्थल पर उनका मालिकाना हक साबित नहीं किया गया था। हालांकि उन्होंने आगे ये भी कहा कि हिंदू (Hindu) जब भी पूजा करने की खुली छूट मांगते हैं तो विवाद होना शुरू होता है। वकील द्वारा कोर्ट को बताया गया कि 72 साल के मोहम्मद हाशिम ने गवाही में कहा था कि हिंदुओं के लिए अयोध्या उतना ही महत्व रखता है, जितना मुसलमानों के लिए मक्का।

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इससे पहले रामलला विराजमान की तरफ से के परासरण ने कहा कि इस मामले को किसी तरह से टालना नहीं चाहिए, अगर किसी वकील ने ये केस हाथ में लिया है तो उसे पूरा करना चाहिए। बीच में कोई दूसरा केस नहीं लेना चाहिए के परासरण ने अपनी दलीलें पूरी कर दी हैं। अब रामलला की तरफ से एससी वैद्यनाथन अपनी दलील रख रहे हैं। सुनवाई के दौरान वकील वैद्यनाथन ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने ही अपने एक फैसले में कहा था कि मंदिर के लिए मूर्ति होना जरूरी नहीं है। अब रामजन्मभूमि को लेकर जो आस्था है, वह सभी शर्तों को पूरा करती है। उन्होंने मुस्लिम पक्ष की दलील को पढ़ते हुए कहा कि उनके पास कोई सबूत नहीं है कि उनके पास कब्जा है या कब्जा चला आ रहा है। अगर कोई स्थान देवता है, तो फिर उसके लिए आस्था मान्य होनी चाहिए।

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