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दृष्टिहीनों के लिए पुस्तकें तैयार कर रहा NBT

दृष्टिहीनों के लिए पुस्तकें तैयार कर रहा NBT

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बलदेव भाई शर्मा बोले,पहली बार दृष्टिहीन पाठकों को भी अपने एजेंडे किया शामिल

NBT : शिमला। नेशनल बुक ट्रस्ट ने दृष्टिहीनों के लिए पुस्तकें तैयार करने की एक विशेष परियोजना पर काम शुरु किया है। इसके तहत ब्रेल लिपि के अलावा ई-बुक्स भी तैयार की जा रही है। यह पहला अवसर है कि भारत सरकार के प्रकाशन ने दृष्टिहीन पाठकों को भी अपने एजेंडे में शामिल किया है। नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के अध्यक्ष एवं विख्यात लेखक बलदेव भाई शर्मा ने कही।

ब्रेल लिपि में 4 और इलेक्ट्रानिक्स फॉर्मेट में 100 से अधिक पुस्तकें तैयार

वे प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा एवं मुक्त अध्ययन संस्थान (इक्डोल) में व्याख्यान माला के तहत आयोजित एक व्याख्यान में बोल रहे थे। “डिजिटल युग में पुस्तकों का महत्व” विषय पर व्याख्यान में उन्होंने कहा कि एनबीटी ने अपनी विशेष परियोजना के तहत ब्रेल लिपि में 4 पुस्तकें और 100 से अधिक पुस्तकें इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में तैयार की हैं। ई-पुस्तकें दृष्टिहीन कंप्यूटर के जरिए सुन सकते हैं।


उन्होंने कहा कि देश और विदेश में दृष्टिहीन अब एक बहुत बड़ा पाठक वर्ग है। इसलिए एनबीटी का अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने इस दिशा में विशेष प्रयास शुरू किए, ताकि दृष्टिहीन लोगों को भी कम कीमत पर अच्छे स्तर की पुस्तकें उपलब्ध कराई जा सके। उनका कहना था कि पुस्तकें ही मनुष्य की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं।

छपे शब्दों का कोई विकल्प नहीं

बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि छपे हुए शब्दों का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में टीवी चैनलों और ऑनलाइन पत्रकारिता के जबरदस्त विस्तार के बावजूद पुस्तकों का प्रकाशन पिछले 10 वर्षों में न सिर्फ बढ़ा है, बल्कि पाठकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। उनका कहना था कि देश के दूरदराज क्षेत्रों और जनजातीय इलाकों में भी लोग पुस्तकों को खरीदना चाहते हैं, लेकिन उनके घर द्वार पर पुस्तक की उपलब्धता का न होना और कीमतें उनकी क्रय क्षमता से ज्यादा होना अभी भी एक बड़ी कठिनाई है। उनका कहना था कि इसलिए एनबीटी रियायती दामों पर उच्च स्तरीय पुस्तकें तैयार कर पूरे देश में उपलब्ध कराती है। इसके लिए अत्याधुनिक वाहनों का प्रयोग किया जाता है जो दूरदराज के क्षेत्रों में जाकर पुस्तकों का प्रदर्शन और बिक्री करते हैं।

कुलपति प्रो. एडीएन बाजपेई ने इस मौके पर कहा कि इक्डोल में नवाचारों की कड़ी में यह एक महत्वपूर्ण व्याख्यान है और शायद विश्वविद्यालय में पहली बार पुस्तकों के पठन-पाठन को लेकर इतनी गंभीर चर्चा की गई। प्रो. प्रदीप वैद ने कहा कि इकडोल की व्याख्यान माला काफी सफल साबित हो रही है। राज्य शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रो चमन लाल गुप्त ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक विद्यार्थियों में पुस्तकों के प्रति रुचि जगाने में  महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं।

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