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नया नियम: मिड-डे मील वर्कर्स नहीं पहन सकेंगे अंगूठी- चूड़ियां; Nail Polish लगाने पर भी मनाही

 रसोइयों और सहायकों को सुरक्षात्मक एप्रन और हेडगियर्स प्रदान किए जाएंगे

नया नियम: मिड-डे मील वर्कर्स नहीं पहन सकेंगे अंगूठी- चूड़ियां; Nail Polish लगाने पर भी मनाही

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नई दिल्ली। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली बच्चों के लिए मिड-डे-मील (Mid-day meal) की तैयारी व वितरण को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत, खाना बनाने वालों को नेल पॉलिश और कृत्रिम नाखून लगाने पर मनाही है। दिशानिर्देश में कहा गया है, ‘खाना पकाने-परोसने के दौरान कोई घड़ियां, अंगूठियां, आभूषण और चूड़ियां ना पहनें, क्योंकि इससे खाने के दूषित होने का खतरा रहता है।’ गौरतलब है कि देश भर के स्कूल अक्टूबर के मध्य से क्रमबद्ध तरीके से खुलने के लिए तैयार हो रहे हैं। ऐसे में केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विस्तृत दिशानिर्देश प्रोटोकॉल जारी किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए पौष्टिक भोजन परोसा जा सके।


नए नियम अभी और भी हैं; यहां पढ़ें

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मिड डे मील की तैयारी और वितरण के लिए एक विस्तृत दिशानिर्देश प्रोटोकॉल प्रदान केरते हुए निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित करना जिला या ब्लॉक प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि मिड डे मील वर्कर्स में से कोई भी COVID पॉजिटिव ना हो। इसके अलावा सभी कुक सह सहायकों को स्कूल में अपना काम शुरू करने से पहले अपने और अपने परिवार के स्वास्थ के बारे में एक स्व-घोषणा देनी होगी। तापमान की जांच के लिए कुक सह सहायकों की थर्मल स्कैनिंग स्कूल के प्रवेश पर की जाएगी। मास्क पहनना अनिवार्य होगा।

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इसके अलावा रसोई में थूकना और नाक बहना सख्त वर्जित होगा। रसोइयों और सहायकों को पर्याप्त और उपयुक्त स्वच्छ सुरक्षात्मक एप्रन और हेडगियर्स प्रदान किए जाएंगे। प्रोटोकॉल में साफ बर्तनों के उपयोग पर जोर दिया गया है। नए दिशानिर्देश के अनुसार सब्जियों को नमक और हल्दी या 50 पीपीएम क्लोरीन (या समतुल्य घोल) और स्वच्छ पीने योग्य पानी के संयोजन से अच्छी तरह से धोया जाना चाहिए। नई गाइडलाइंस के अनुसार भोजन के तापमान को कम से कम 65 डिग्री सेल्सियस पर बनाए रखना चाहिए। भोजन को पकाने के तुरंत बाद परोसा जाना चाहिए। नए नियमों के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने दिशानिर्देशों के आधार पर अपने प्रोटोकॉल बना सकते हैं।

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