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NHM कर्मी @ Kaul Singh : मंत्री जी, कुछ तो करो हमारा

NHM कर्मी @ Kaul Singh : मंत्री जी, कुछ तो करो हमारा

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पॉलिसी को लेकर लटकी फाइल को कैबिनेट में मंजूरी दिलाने की मांग

मंडी। साहब! सरकारी नौकरी के चक्कर में जिंदगी निकल गई। नौकरी भी ऐसी मिली है कि न तो इसे छोड़ सकते हैं और न आगे करने की हिम्मत बची है। प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में बतौर एनएचएम तैनात कर्मचारी अब उस घड़ी को कोस रहे हैं, जब उन्होंने यह नौकरी ज्वाइन की थी। पक्की नौकरी की आस में उम्र बीत गई, कई कर्मचारी तो ऐसे हैं जो अपनी रिटायमेंट की दहलीज पर आ पहुंचे हैं।बहरहाल, मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर के पास पहुंचे एनएचएम के दर्जनों कर्मचारियों ने उन्हें अपना दुखड़ा सुनाया। 

इन कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने एक वर्ष पहले स्वास्थ्य विभाग में एनएचएम कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाने का जो निर्णय लिया था उस निर्णय को सरकार आज दिन तक लागू नहीं कर पाई है। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एनएचएम के तहत करीब 1500 कर्मचारी बीते 18 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।इन कर्मचारियों ने सरकार से इन्हें नियमित करने की मांग उठाई थी। फरवरी 2016 में सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाने का निर्णय कैबिनेट की बैठक में लिया था। 

सभी कर्मचारियों की डिटेल मंगवाकर एक पूरी फाइल तैयार की गई, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह फाइल कैबिनेट की बैठक तक नहीं पहुंच पाई। नतीजतन 1500 कर्मचारी अभी तक पॉलिसी बनने के इंतजार में हैं। इन कर्मचारियों ने मंडी में स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर से एक बार फिर मुलाकात करके इनकी फाइल को कैबिनेट में ले जाने की गुहार लगाई है।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिया भरोसा

वहीं स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने इस फाइल को ले जाकर उसे मंजूरी दिलाने का भरोसा दिलाया है। वहीं एनएचएम कांट्रेक्चुअल हेल्थ सोसायटी एसोसिएशन की राज्य प्रधान दुष्यंता चौहान ने बताया कि पहले सरकार ने इन कर्मचारियों को रेगुलर-पे स्केल देने का निर्णय लिया और बाद में अनुबंध पर लाने का, लेकिन कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि इन्हें सीधे नियमित किया जाए क्योंकि अधिकतर कर्मचारी ऐसे हैं जो अपनी सेवानिवृत्ति की आयु में हैं। इन्होंने सरकार से मांग उठाई है कि ठोस नीति बनाकर कर्मचारियों को नियमित किया जाए।

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