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Jawali में अपनों से हारती BJP

Jawali में अपनों से हारती BJP

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धर्मशाला। प्रदेश सरकार में शिक्षा विभाग के सीपीएस और ज्वाली विधानसभा क्षेत्र से विधायक नीरज भारती द्वारा फेसबुक पर की जाने वाली तल्ख टिप्पणियों पर भले ही प्रदेशभर की बीजेपी एकजुट है, लेकिन चुनावों की बात करें तो ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में स्थिति ठीक इसके विपरीत है। यहां बीजेपी की जंग कांग्रेस प्रत्याशी से नहीं बल्कि अपने ही नेताओं के बीच में होती है।

  • नीरज को मिला बीजेपी की फूट का लाभ
  • टिकट के तलबगारों की तादाद बढ़ी

पिछले विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी की फूट का सीधा लाभ भारती को मिला था और आगामी चुनावों में भी स्थिति कुछ बदली नहीं है बल्कि और भी बिगड़कर सामने आयी है। कांग्रेस में नीरज भारती के अलावा कोई टिकट का दावेदार फिलहाल नजर नहीं आ रहा।


कुछ कांग्रेसी नीरज की कार्यप्रणाली के विरोध में उठकर खड़े भी हुए थे लेकिन वह ज्यादा दिन खड़े नहीं रह सके। क्षेत्र के मतदाताओं ने जिला परिषद चुनावों में उन्हें पटखनी दे दी और अब वह नए सिरे से अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में ही मशरूफ हैं। बीजेपी में टिकट के तलबगारों की तादाद पिछले चुनावों की अपेक्षा बढ़ी है। पिछली बार बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़े अर्जुन ठाकुर इस बार भी चुनाव मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। वहीं टिकट नहीं मिलने के बाद आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले संजय गुलेरिया की पार्टी में वापसी भी हुई है और वह भी अभी तक मैदान से हटने के लिए तैयार नहीं हैं। संजय गुलेरिया के बागी होने का खामियाजा बीजेपी विगत चुनावों में भुगत चुकी है। इस बार भी संजय क्या रुख अपनाते हैं यह देखने योग्य होगा।

अभिजीत जम्वाल और योगराज मेहरा भी बीजेपी की टिकट हासिल करके चुनाव मैदान में कूदने को तैयार हैं। इन दोनों का भी अपना जनाधार है जिससे इनके बागी होने की स्थिति में बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रदेश युवा मोर्चा के अध्यक्ष बनकर सामने आए विशाल चौहान ने भी ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के चुनावी समीकरण उलझा कर रख दिए हैं। आगामी चुनावों में युवा मोर्चा के कोटे के तहत विशाल भी अपनी दावेदारी जताने के मूड में हैं। इन हालात में यह तो तय है कि ज्वाली में नीरज भारती से मुकाबले के लिए बीजेपी की राह आसान नहीं है। बीजेपी प्रत्याशी को सबसे पहले तो अपने ही नेताओं से टिकट की जंग जीतनी होगी और उसके बाद टिकट न मिलने वालों को भी साथ लेकर चलने की गम्भीर चुनौती से पार पाना होगा।

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