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खिलाड़ियों के हालः खेलें या फिर पानी करें गर्म, खाना भी बनाना पड़ता है खुद

खिलाड़ियों के हालः खेलें या फिर पानी करें गर्म, खाना भी बनाना पड़ता है खुद

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सुंदरनगर। हिमाचल सरकार एक और खेल नीति बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश में खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने के लिए पर्याप्त कोच तक नहीं हैं। अगर बात हम हॉकी खेल की करें तो हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग के सात हॉकी हॉस्टल हैं, लेकिन इनमें से मात्र दो ही हॉकी हॉस्टल में शिक्षा विभाग के नियमित कोच हैं, बाकी पांच जगह पर शिक्षा विभाग के हॉकी के हॉस्टलों में कोई भी कोच नहीं है। वहां पर काम चलाऊ कोचों के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है। इतना ही नहीं बल्कि शिक्षा विभाग के हॉस्टल में पर्याप्त सुविधा नहीं है। खिलाड़ी स्वयं खाना पकाने से लेकर सर्द मौसम में आग जला कर पानी गर्म करने के साथ अन्य सुविधाएं जुटाने में विवश हैं, ऐसे में ना तो अपना पूरा ध्यान खेल की ओर लगा पा रहे हैं और ना ही पढ़ाई की ओर।

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सुंदरनगर के सीसे स्कूल (बाल) के परिसर में प्रदेश के शिक्षा विभाग ने करीब दो दशक पहले छात्रों के लिए राष्ट्रीय खेल हॉकी को बढ़ावा देने के लिए छात्रावास खोला था। छात्रावास में हालात यह है कि यहां पर पिछले करीब छह साल से कुक नहीं है, जिसके कारण बच्चों को स्वयं ही मिलजुल कर खाना बनाने को मजबूर होना पड़ता है। छात्रावास में वार्डन की भी लंबे समय से नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिसके कारण सारी जिम्मेदारी कोच पर ही पड़ी हुई है। छात्रावास के रसोई घर व स्नानागार की हालत बद से बदतर है।

क्या कहते हैं खिलाड़ी

खिलाड़ियों का कहना है कि हॉस्टल में सफाई कर्मचारी न होने से सफाई खुद करनी पड़ती है और प्राइवेट कुक के साथ सहयोग कर छात्रों को खुद ही खाना बनाना पड़ता है और सर्द मौसम में आग जला कर नहाने के लिए पानी गर्म करना पड़ता है, क्योंकि हॉस्टल में गीजर की सुविधा नहीं है। कमरों में खिलाड़ियों को अपना सामान रखने के लिए अलमारियां तक उपलब्ध नहीं हैं, जो बेड व गद्दे उपलब्ध हैं, वह खेल खेलने के बाद थकने वाले खिलाड़ियों को कोई आराम प्रदान नहीं करते हैं। छात्रावास का भवन भी करीब पांच दशक पुराना जर्जर हालत में है। खिलाड़ी बच्चों को बीमार होने पर मेडिकल का खर्चा भी स्वयं ही वहन करना पड़ता है। यहां तक की उनकी पढ़ाई के लिए फीस तक माफ नहीं है। उन्हें जेब से ही सीसे स्कूल में फीस भरनी पड़ती है।

रोजाना 120 रुपए डाइट नाकाफी

छात्रावास में 13-18 वर्ष आयु के 30 छात्र रहते हैं, जिन्हें रोजाना खाने के लिए 120 रुपए डाइट का शिक्षा विभाग की ओर से प्रावधान है। इन 120 रुपए में गैस का खर्च भी शामिल रहता है। जो महंगाई के इस दौरा में प्रोटिनयुक्त खाने के लिए बेहद कम है। प्रदेश में युवा सेवाएं एव खेल विभाग के जो छात्रावास है, वहां पर खिलाडिय़ों के लिए 150 रुपए प्रतिदिन व साई के खेल छात्रावासों में 300 रुपए प्रतिदिन डाइट पर खर्च किए जाते हैं, जो साफ दर्शाता है कि प्रदेश का शिक्षा विभाग खिलाड़ियों के स्वास्थ्य को लेकर कितना चिंतित है।

जमा दो पास करने के बाद जब यह चैंपियन खिलाड़ी छात्रावास से निकलते हैं, तो उन्हें आगे इस खेल को खेलने के लिए कोई भी राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाता है, जिसके कारण उनका खेल जमा दो पास करने के साथ ही समाप्त हो जाता है।

 

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