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चामुंडा मंदिर के रिस्टोरेशन को लेकर ADB के काम से असंतुष्ट मंदिर न्यास के गैर सरकारी सदस्य

निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप पूर्ण ना होने पर जताई आपत्ति

चामुंडा मंदिर के रिस्टोरेशन को लेकर ADB के काम से असंतुष्ट मंदिर न्यास के गैर सरकारी सदस्य

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धर्मशाला। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध धार्मिक एवं तीर्थ स्थल चामुंडा नंदीकेश्वर धाम में एशियन डेवलपमेंट बैंक की परियोजना के तहत रिस्टोरेशन एंड इम्प्रूवमेंट ऑफ़ चामुंडा टेंपल के निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप पूर्ण ना होने पर मंदिर न्यास के गैर सरकारी सदस्यों ने आपत्ति जताई है। गैर सरकारी सदस्यों (Non-official members) घनश्याम वर्मा व मनीष सूद ने आरोप लगाया कि एडीबी के अधिकारियों ने मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं व मंदिर न्यास व पुजारियों की सहूलियतों के अनुसार निर्माण कार्य नहीं किए हैं। जबकि इन्हें समय-समय पर पत्राचार कर निर्माण कार्यों के संबंध में अवगत करवाया गया। बावजूद इसके एडीबी अपने तौर तरीके से कार्य करता रहा।

यह भी पढ़ें: चामुंडा मंदिर के सौंदर्यीकरण, निर्माण कार्यों के लिए खर्च होंगे साढ़े सात करोड़

 

10 करोड़ से अधिक खर्च, श्रद्धालुओं को फिर भी नहीं मिलेंगी आधारभूत सुविधाएं

पर्यटन व धर्मिक पर्यटन (Religious Tourism) को बढ़ावा देने के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक ने जून 2016 में 215 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट ट्रांचे-3 के तहत स्वीकृत किया था। जिसके अंतर्गत 11 सब-प्रोजेक्ट चिन्हित किए गए थे। इनमें से एक सब-प्रोजेक्ट रिस्टोरेशन एंड इम्प्रूवमेंट ऑफ़ श्री चामुंडा नंदीकेश्वर मंदिर परिसर में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन विभाग के माध्यम से एडीबी परियोजना का कार्य वर्ष 2017 में आरंभ किया गया था। इस परियोजना पर अनुमानित लागत 6.29 करोड़ रुपए आंकी गई थी। परियोजना पर 99 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने तक 10 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इस परियोजना स्थल पर मंदिर के संस्कृत कॉलेज, सराय, कार्यालय भवन, वीआईपी सभागार, माता की रसोई, पुजारी कक्ष, कनिष्ठ अभियंता कार्यालय, रास्ते, पार्क व अन्य अति आवश्यक भवन मौजूद थे। एडीबी (ADB) परियोजना शुरू होने से पूर्व इन सभी भवनों को वहां से हटा दिया गया था। इन भवनों के स्थान पर चार प्रतीक्षा हाल, रास्ता, गेट, वीआईपी पार्किंग, पुरानी झील की मरम्मत विभिन्न पार्कों तथा गाड़ियों के लिए लंगर के समीप पार्किंग का कार्य किया गया। माता की रसोई अन्य भवन जो पूर्व में मंदिर के पूजा-अर्चना के लिए इस्तेमाल किए जाते थे वह नहीं बनाए गए। यहां तक की मंदिर के प्रवेश द्वार के साथ एक पुरानी यज्ञशाला निर्मित थी लेकिन परियोजना के तहत इसका निर्माण भी नहीं किया गया। इस संबंध में मंदिर न्यास ने समय-समय पर पत्राचार कर एडीबी के अधिकारियों को सूचित भी किया, लेकिन इसके बावजूद भी इन निर्माण कार्यों को नहीं किया गया।

माता की रसोई, पुजारी कक्ष, यज्ञशाला, सराय का निर्माण, संस्कृत कॉलेज का नहीं हुआ निर्माण

मंदिर न्यास ने इस संबंध में एडीबी अधिकारियों को इस परियोजना को मंदिर न्यास को सौंपने से पूर्व माता की पूजा अर्चना के लिए प्रतिदिन दिनचर्या भवन जैसे कि माता की रसोई, पुजारी कक्ष, यज्ञशाला (नवरात्रा में अनुष्ठान के समय इस यज्ञशाला में 108 पंडित विशेष पूजा अर्चना करते हैं), माता जी के वस्त्रों का भंडार, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सराय का निर्माण, संस्कृत कॉलेज व आवास सुविधा, वीआईपी कक्ष, कार्यालय भवन, कनिष्ठ अभियंता कार्यालय, श्रद्धालुओं के लिए शौचालय समेत अति महत्वपूर्ण भवनों के पुनर्निर्माण का आग्रह किया है। इन सभी भवनों के अभाव में मंदिर न्यास में मंदिर पुजारियों को वर्तमान में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एडीबी के अधिकारी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं व मंदिर न्यास की सुहलियतों के अनुसार निर्माण कार्य नहीं किए।

निर्माण कार्य संतोषजनक नहीं, बरसात का पानी सीधा मंदिर तक

नवनिर्मित चार प्रतीक्षा हाल को जो निर्माण किया गया है वह भी चारों ओर से खुलें हैं। इनकी खिड़कियों में भी कोई सुरक्षा ग्रिल नहीं और न ही दरवाजे या गेट भी नहीं लगाए गए हैं। इन भवनों से बरसात का पानी सीधा मंदिर तक आ जा रहा है। इसके अतिरिक्त बन्दर,कबूतर व पशुओं के भी अंदर आने का खतरा है। निर्माण कार्य भी संतोषजनक नहीं है। जिसके चलते प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मंदिर तक बने दोनों ओर के हालों, रास्ता में विभिन्न दीवारों, स्लैब में अभी से सीलन आना शुरू हो गई है। मंदिर के समीप इस परियोजना के तहत एक बड़ा शौचालय ब्लॉक बनाया जाना आवश्यक था जिसका भी निर्माण नहीं किया गया। इसके बावजूद एडीबी के शिमला स्थित कार्यालय के प्रोजेक्ट डायरेक्टर व ढलियारा स्थित एडीबी कार्यालय के प्रोजेक्ट मैनेजर द्वारा इस परियोजना कार्य को संपूर्ण बताया जा रहा है।

इस बारे में लोकसभा सांसद किशन कपूर ने कहा कि श्री चामुंडा नंदीकेश्वर मंदिर के निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय लोग मिले थे। जिसके चलते मौका पर जाकर निरिक्षण कर डीसी कांगड़ा को मंदिर परिसर में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। मंदिर न्यास अति महत्वपूर्ण भवनों का पुनर्निर्माण करेगा जिसका प्रावधान रखा गया है। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट फॉर टूरिज्म, हिमाचल प्रदेश के प्रोजेक्ट मैनेजर धर्मिंदर शर्मा का कहना है कि एशियन डेवलपमेंट बैंक की परियोजना के तहत रेस्टोरेशन एंड इम्प्रूवमेंट ऑफ़ चामुंडा टेम्पल का निर्माण एडीबी के साथ हुए एमओयू के मापदंडों पर किया गया है। दीवारों और स्लैब में एक तरफ सीलन आने का कारण पुराने भवनों की दीवारें हैं। श्रद्धालुओं के लिए शौचालयों का निर्माण स्थान उपलब्ध न होने के कारण नहीं किया जा सका है। अन्य भवन पूर्व में निर्मित थे उनका परियोजना में पुनर्निर्माण शामिल नहीं था जिसके चलते नहीं बनाए गए।

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