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Budget session से पहले नहीं बनाई स्थाई नीति तो परिवार सहित देंगे धरना

Budget session से पहले नहीं बनाई स्थाई नीति तो परिवार सहित देंगे धरना

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धर्मशाला। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत करीब 1500 कर्मचारी काम कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने 16 फरवरी 2016 को कैबिनेट बैठक में इन कर्मचारियों के नियमितिकरण के लिए स्थाई नीति बनाने को मंजूरी प्रदान की थी। अब एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कैबिनेट के इस फैसले को अमलीजामा नहीं पहनाया गया है, जिससे इन कर्मचारियों में हताशा और निराशा फैल रही है। प्रदेश सरकार और विभाग ने यदि आगामी बजट सत्र से पहले कैबिनेट के फैसले को अमलीजामा नहीं पहनाया तो मजबूरन यह कर्मचारी मार्च माह में शिमला में परिवार सहित धरने पर बैठ जाएंगे। यह शब्द स्वास्थ्य अनुबंधित समिति कर्मचारी संघ हिमाचल प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष दुष्यंता चौहान, प्रदेश महासचिव अशरफ खान, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश कश्यप और प्रदेश प्रेस सचिव राजकुमार महाजन ने जारी एक संयुक्त ब्यान में कहे।


  • स्वास्थ्य अनुबंधित समिति कर्मचारी संघ ने सरकार, विभाग को चेताया
  • कैबिनेट के फैसले के बाद भी नहीं बनी नियमितिकरण की नीति
  • शैक्षणिक, तकनीकी तौर पर निपुण होने के बावजूद भी अनदेखी का शिकार

उक्त पदाधिकारियों का कहना है कि अपनी इस मांग को लेकर संघ सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, प्रधान सचिव, स्वास्थ्य सचिव, मिशन निदेशक एवं निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं सहित युवा कांग्रेस से भी कई बार मिल चुका है। संघ सरकार और विभाग के विभिन्न स्तरों पर कैबिनेट के निर्णय को अमलीजामा पहनाने के लिए आग्रह कर चुका है लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है।  उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 126 आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर को नियमित किया जा चुका है, जिन्होंने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया था। वहीं यह लोग पिछले 15 से 20 वर्षों से विभाग में अनुबंध आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। हाल ही में प्रदेश सरकार ने 122 पार्ट टाइम कर्मचारियों को नियमित करके स्वास्थ्य विभाग में तैनाती दी है जबकि ये प्रदेश में दूसरे विभागों में सेवाएं दे रहे थे। स्वास्थ्य अनुबंधित समिति कर्मचारी संघ के सदस्य शैक्षणिक और तकनीकी तौर पर निपुण होने के बावजूद भी अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि सरकार उनके हित में जल्द अपने निर्णय को पूरा करेगी और कर्मचारी हितैषी होने की अपनी परंपरा का निर्वहन करेगी।


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