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अब Surrogacy से नहीं बन सकेंगे Single parent !

अब Surrogacy से नहीं बन सकेंगे Single parent !

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सरोगेसी के जरिए बच्चा पाने की चाह रखने वालों के लिए एक बुरी खबर है। अब कानून की सीमा के अंदर रहकर सिंगल पेरेंट बनना मुश्किल होगा। अभिनेता तुषार कपूर के बाद फिल्म निर्माता-निर्देशक करन जौहर भी सिंगल पैरंट बने हैं, लेकिन अब एक बार फिर से सरोगेसी को लेकर जंग छिड़ गई है और  फिलहाल सेरोगेसी बिल को संसद से मंजूरी मिलने का इंतजार है। इसके बावजूद ज्यादातर डॉक्टरों ने अब सिंगल और गे व्यक्तियों को क्लायंट के तौर पर स्वीकार करना बंद कर दिया है।

सरोगेसी बिल 2016 के जरिए न सिर्फ व्यावसायिक सेरोगेसी पर रोक लगाई जाएगी बल्कि होमोसेक्सुअल कपल, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग और सिंगल व्यक्ति भी पेरेंट बनने के लिए सरोगेसी का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इस बिल के मौजूदा ड्राफ्ट के मुताबिक, ऐसे हेट्रोसेक्सुअल कपल जिनकी शादी को 5 साल से ज्यादा हो चुका है और जिन्हें किसी मेडिकल कारण से बच्चा नहीं हो सकता और इसका उनके पास सबूत है, सिर्फ वही सरोगेसी का इस्तेमाल कर सकेंगे। करन जौहर के जुड़वा बच्चों, रूही और यश की डिलीवरी IVF एक्सपर्ट डॉक्टर जतिन शाह ने करवाई। उन्होंने कहा कि हां, एक बार यह सरोगेसी बिल, कानून बन जाए उसके बाद हम सिंगल व्यक्तियों के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।’

शाह बताते हैं कि उनके दूसरे क्लायंट्स की तरह करन जौहर भी सिर्फ एक काउंसलिंग सेशन में ही सरोगेसी का यह फैसला ले लिया था। अगर कल के दिन कोई ऐसा व्यक्ति जो शादीशुदा नहीं है या सेम सेक्स के व्यक्ति के साथ रिलेशनशिप में है और वह करण जौहर से प्रेरित होकर पैरंट बनना चाहता है तो उसे 99 फीसदी क्लिनिक में रिजेक्शन के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि ज्यादातर लोगों ने नियम-कानून की वजह से संदेहास्पद परिस्थितियों में सरोगेसी करना बंद कर दिया है।इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ICMR की हेड डॉ.सॉम्या स्वामिनाथन बताती हैं कि इस केस की वजह से एक बार फिर भारत में सरोगेसी का सच सामने आ गया है। अमीर लोग सरोगेसी का खर्च उठा सकते हैं और सरोगेट मदर हमेशा ही कोई गरीब औरत होती है। इस केस में भले ही करन जौहर ने अपने जुड़वा बच्चों को स्वीकार कर लिया हो, लेकिन इससे पहले ऐसे कई केस हो चुके हैं जहां पैरेंट्स बनने वालों ने एक बच्चे को छोड़ दिया हो। लिहाजा सरोगेसी कानून बेहद जरूरी है ताकि बच्चे के साथ ही सरोगेट मदर के अधिकारों की भी रक्षा की जा सके।

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