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…तो ढूंढ़ते रह जाओगे नूरपुरी संतरा

…तो ढूंढ़ते रह जाओगे नूरपुरी संतरा

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ऋषि महाजन/ नूरपुर । मिनी नागपुर के नाम से मशहूर नूरपुर में संतरे का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर है। क्षेत्र में हर वर्ष संतरे की पैदावार कम होती जा रही है, जो एक चिंता का विषय है, जिसके कारण क्षेत्र के बागवानों के चेहरे पर मायूसी नजर आ रही है। अगर किसानों की मानें तो सरकार की उदासीनता के चलते यह समस्या पैदा हुई है। अगर आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो वर्ष 14-15 में संतरे का उत्पादन 2021.52 मीट्रिक टन था, जबकि वर्ष 15-16 में संतरा 476.72 मीट्रिक टन रह गया है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र के जो विभागीय अधिकारी हैं वह किसानों के साथ कभी भी संपर्क में नहीं रहे हैं, ना ही उन्हें आ रही दिक्कतों का हल बताया जाता है। संतरे का जो फल दिसंबर में माह मैं तैयार हो जाता है, लेकिन इस बार बारिश ना होने के कारण बागवानों के चेहरे पर मायूसी साफ नजर आ रही है। संतरे का ना तो अब तक कोई साइज बन पाया है ना ही उस पर रंगत व मिठास आ पाई है।

  • साल दर साल उत्पादन में आई गिरावट, बागवान चिंतिंत
  • वर्ष 14-15 में उत्पादन 2021.52 मीट्रिक टन तो 15-16 में 476.72 मीट्रिक टन रह गया

orange1बागवान इस की पैदावार के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। संतरे का पौधा पर्याप्त मात्रा में पानी मिलने से 200 ग्रांम 500 ग्राम तक होता है, जबकि अभी तक यह 200 ग्राम से नीचे ही रह गया है । बागवानों का कहना है कि आजकल हाईटेक का जमाना है मोबाइल एप चल रहे हैं सरकार को इस माध्यम का उपयोग कर सीधे किसानों को अधिकारियों के साथ जोड़ना चाहिए, ताकि इस से किसानों समय-समय पर मौसम के हिसाब से दवाइयों आदि की जानकारी मिलती रहे। बागवान मुकेश, रशपाल पठानिया, शशि शर्मा, दविंदर सिंह आदि का कहना है कि किसानों को संतरे की पैदावार में सिंचाई व दवाइयों की समस्या आ रही है। विभागीय अधिकारी उन्हें कोई जानकारी नहीं देते, ना ही उनके खेतों में आते हैं, विभाग द्वारा जो दवाइया रिकमेंड की जाती हैं, वह मार्केट में उपलब्ध नहीं होती हैं, जबकि हजारों रुपए सरकार द्वारा इन पर खर्च किए जा रहे हैं। दूसरा संतरे की मार्केट में भारी समस्या आती है। इसके अलावा जो हॉर्टिकल्चर पॉलीहाउस लगाए गए हैं। सरकार द्वारा उन्हें दी जाने वाली बकाया राशि भी नहीं मिल रही है। किसानों का कहना कि सरकार किसानों को राशि का प्रावधान करवाएं और नूरपुर संतरे की पहचान को ना खोने दे।
gggक्या कहते हैं मंडी बोर्ड के निदेशक
प्रदेश मंडी बोर्ड के निदेशक विकाश चंबियाल ने बताया कि नूरपुर का संतरा पूरे हिमाचल में जैसे ऊपरी हिमाचल में सेब से मशहूर है। वैसे ही यहां संतरा मशहूर है और इसे मिनी नागपुर के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बचनबद्ध है कि संतरे की पैदावार को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि मंडी बोर्ड ने हाल ही में नौणी यूनिवर्सिटी में कई संतरे की प्रजातियों का आविष्कार किया है, जो मौसम के बूरे वक्त में भी संतरे के पेड़ को खत्म नहीं होने देगी ।
क्या कहते हैं अधिकारी
उद्यान विकास अधिकारी सुरेंद्र राणा का कहना है कि किसान अगर उन्हें कोई समस्या बताएं तो उसका हल कर देते हैं, लेकिन अधिकतर किसान उन तक नहीं पहुंच पाते हैं और आगर किसी गंभीर समस्या का पता चले तो वह उसे रिसर्च पहुंचते ही नहीं हैं। अगर कुछ बीमारी का उन्हें पता ना चले तो वह उन्हें रिसर्च इंस्टीट्यूट जाच्छ में किसानों को उनकी सलाह के लिए भेजते हैं। सरकारी आंकड़े सन्तरे का गिरता ग्राफ दिखाते हुए।

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