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घृत सम्मेलन में बाली-शांता के खिलाफ पोस्टर

घृत सम्मेलन में बाली-शांता के खिलाफ पोस्टर

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गफूर खान/ धर्मशाला। अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी का मसीहा कौन इसे लेकर चल रही जंग के बीच आज भारतीय क्षत्रिय घृत बाहती चाहंग महासभा के स्थापना दिवस पर बुलाए गए विशाल सम्मेलन में इस बात के तो संकेत साफ मिल गए कि बिरादरी में बीजेपी सांसद शांता कुमार व परिवहन मंत्री जीएस बाली के खिलाफ अंदर ही अंदर जो गुस्सा चल रहा था वह अब बाहर आने लगा है।

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दोनों को दरकिनार करने की बिरादरी से अपील

मंदल में चल रहे इस सम्मेलन में शुरूआत में ही परिवहन मंत्री जीएस बाली और सांसद शांता कुमार के विरोध में पोस्टर बंटे। इसमें दोनों नेताओं द्वारा बिरादरी को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए इन दोनों को दरकिनार करने की अपील बिरादरी से की गई है।

neeraj-posterयही नहीं अभी यह पोस्टर बंटे ही थे कि वहीं पर सीपीएस नीरज भारती के खिलाफ भी पोस्टर बंटना शुरू हो गए। इन पोस्टरों में नीरज भारती द्वारा फेसबुक पर गाय के बारे में की गई टिप्पणी का विरोध जताया गया है और भारती से सवाल किया गया है कि आखिर गाय माता ने उनका या किसी का क्या बिगाड़ा है। इस पर महासभा के एक पदाधिकारी को बाकायदा मंच पर आकर पोस्टर बांटने वालों को ऐसा नहीं करने की चेतावनी देनी पड़ी।

gafoor3वहीं, महासभा के कुछ पदाधिकारी इन पोस्टरों को लोगों से छीनकर छिपाते भी देखे गए। एक तरफ जहां कार्यक्रम चल रहा है तो वहीं पंडाल में पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। बताते चलें कि इस सम्मेलन में सीपीएस नीरज भारती बतौर मुख्यातिथि आए हुए हैं जबकि विधायक पवन काजल भी विशेष अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में उपस्थित हैं। इसके अलावा महासभा के जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी इस सम्मेलन में मौजूद हैं। सम्मेलन चल रहा है लेकिन अपने अपने अंदाज में नेता राजनीति में भी जुटे हुए हैं और सम्मेलन का मुख्य मुद्दा बिरादरी की समस्याएं न होकर पंडाल में बांटे गए पोस्टर हो गए हैं।

gafoor2नीरज भारती और पवन काजल का एक साथ एक मंच पर होना उन लोगों के मुंह पर जोरदार तमाचा है, जो इन दोनों के बीच लड़ाई होने की अफवाहें फैला रहे थे। यह शब्द भारतीय क्षत्रिय घृत बाहती चाहंग महासभा के कांगड़ा ब्लॉक अध्यक्ष ओपी चौधरी ने महासभा के सम्मेलन के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहे। चौधरी ने नारा दिया कि निकलो बाहर मकानों से, जंग लड़ो बेईमानों से। उन्होंने कहा कि पार्टियां हमारे लिए मायने नहीं हैं, हम अगर एकजुट हो जाएं तो पार्टियां खुद हमारे दर पर आएंगी। बिरादरी के 20 विधायक होने चाहिए जबकि सिर्फ दो विधायक इन 20 का काम कर रहे हैं। अब भी बिरादरी नहीं जागी तो हमारे हक़ मिलना तो दूर हम अन्य वर्गों के गुलाम होकर ही रह जाएंगे।

बात हो तो बस 27% की

कही-अनकही/ अनल पत्रवाल। मजा तभी आएगा जब बात पते की होगी। बात पते की तभी होगी जब राजनीति बीच में नहीं होगी। राजनीति नहीं होगी तो बात 27 फीसदी की निश्चित तौर पर होगी। केंद्र में वीपी सिंह की सरकार बनने के वक्त से लेकर आज दिन तक 27% का मुद्वा बीच-बीच में उठता रहा, पर वहां भी राजनीति बीच में टांग अड़ाती रही। अब लंबे अंतराल के बाद यह मुद्वा उठा है तो बात दूर तक जानी ही चाहिए, वरना इस मुद्वे को ही दफन कर देने में समझदारी होगी। यहां यह चर्चा हमने इसलिए शुरू की है क्योंकि कल यानी मंगलवार को क्षत्रिय घृत बाहती चाहंग महासभा ने धर्मशाला-कांगड़ा के बीच स्थित मंदल गांव में सालाना अधिवेशन बुलाया है। इस अधिवेशन का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि बीते दिनों ओबीसी से ताल्लुक रखने वाले एक विधायक को थप्पड़ की बात बाहर आने के बाद से अन्य पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) में मसीहा बनने की बातें हो रही है। यहां बात ओबीसी के मसीहा की नहीं बल्कि 27% आरक्षण की है।

obc कल होने वाले अधिवेशन में इस मुद्वे को राजनीति के चश्मे से नहीं बल्कि वर्ग विशेष के हितों के हिसाब से देखना होगा। क्योंकि आरोप-प्रत्यारोप तो लगते ही रहेंगे पर अन्य पिछड़ा वर्ग को क्या 27% आरक्षण मिलेगा या नहीं…। प्रश्न यह नहीं कि किस-किस नेता ने कुर्सी पर बैठकर इस मुद्वे के लिए लड़ाई लड़ी। प्रश्न यह है कि वह लड़ाई अपने हित साधने के लिए थी या फिर वर्ग विशेष के लिए। 27% का मुद्वा तो वर्षों से नेताओं के स्वार्थ में पिसता चला आया है,पर अब इसे जामा पहनाने का सही वक्त आया है। थप्पड़ प्रकरण की गूंज ओबीसी से होते हुए 27% तक पहुंची रही है,अब देखना यह है कि इस मुद्वे को क्षत्रिय घृत बाहती चाहंग महासभा किस रूप में लेती है। महासभा को वो वक्त याद करना होगा जब चौधरी हरिराम, हरदयाल, नारायण चंद पराशर सरीखे नेता इस वर्ग की ही बात किया करते थे।

“आज अगर जरूरत है तो वास्तव में उसी जज्बे की, वरना इस मुद्वे को कुर्सी पर बैठने वाले भुनाते रहेंगे। महासभा का स्वरूप भी आज बड़ा करने की जरूरत है, इसमें कांग्रेस-बीजेपी की बात नहीं है बात है तो वर्ग विशेष की। अगर महासभा अपने पुराने स्वरूप व रूप में निखर कर कल बाहर आती है तो कोई दोराय नहीं कि अब यह मुद्वा ठंडे बस्ते में चला जाए।”

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