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सुना आपने, यूं ठिकाने लगेगी OLD Currency

सुना आपने, यूं ठिकाने लगेगी OLD Currency

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शिमला। आखिर, सरकार पुराने नोटों का करेगी क्या? सवाल जितना साधारण है जवाब उतना ही रोचक। जी हां, क्या आप जानते हैं सरकार की ओर से की गई 500 और 1000 की नोटबंदी के बाद अब इन पुराने नोटों का क्या किया जाएगा। नहीं तो चलिए हम बताते हैं।

  • आरबीआई नोटों की राख से बनाएगा ईंटें
  • ई-नीलामी में आप भी खरीद सकेंगे ये ईंट
  • 25 अरब नोटों को नष्ट करने की है तैयारी

currencyजनता की ओर से बैंकों में जमा करवाए गए लाखों करोड़ रुपये के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों की राख से ईंटें बनाई जाएंगी। फिर इन ईंटों को ई-नीलामी के जरिए बेचा जाएगा। यानि आप भी पुराने नोटों की यादगार इन ईंटों को घर में सजा सकते हैं। बशर्ते इसके लिए आपको कुछ कीमत चुकानी होगी।
कैसे नष्ट होती है पुरानी करंसी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पुराने नोटों को ईंटों में बदलता है। इसके लिए आरबीआई के पास 27 श्रेडिंग और ब्रिकटिंग सिस्टम मशीन (एसबीएस) हैं। ये मशीनें आरबीआई के कई केंद्रों में स्थापित हैं। यहां पुराने व बाजार से लौटाए गए नोटों के पहले छोटे टुकड़े किए जाते हैं। फिर राख में तब्दील कर इनकी ईंटें बना दी जाती हैं। आमतौर पर हर साल 13.5-14 अरब नोटों को नष्ट किया जाता है। मगर इस बार लगभग दोगुने नोट नष्ट करने पड़ेंगे।
25 अरब नोटों की बनेंगी ईंटें
रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि अभी बाजार में 500 और 1000 के 14,179.43 अरब रुपये मूल्य के currency225 अरब नोट हैं। आरबीआई को इन सभी नोटों को नष्ट करने की तैयारी करनी है। इसका मतलब होगा कि मौजूदा क्षमता से काफी ज्यादा नोटों को नष्ट करना होगा। रिजर्व बैंक के मुख्य कार्यों में नोटों को नष्ट करना भी एक अहम काम है। दरअसल, इन वापस आए एक-एक नोट का रिकॉर्ड रखा जाता है। वापस लौटे नोटों को नष्ट करने से पहले उनका मिलान जारी नोटों से किया जाता है, ताकि यह पता लग सके कि बाजार में अभी कितने और नोट शेष हैं। यह रिकॉर्ड इसलिए भी रखना जरूरी है, ताकि इस सीरीज के नकली नोट बाजार में न पहुंचा दिए जाएं। यह सब करने के बाद ही उन्हें नष्ट किया जाता है। वापस किए गए नोटों को बैंक शाखाओं और डाकघरों से उठाकर सुरक्षित नष्ट करने वाले केंद्रों तक पहुंचाने की चुनौती होती है। नोट नष्ट करने की पूरी प्रक्रिया आरबीआई की सख्त निगरानी में होती है।
चलेगा सबसे बड़ा अभियान
नोटों को ईंट में तब्दील करने के बाद इन्हें आरबीआई विभिन्न कार्यालयों के जरिए नीलाम कर देता है। इसके लिए बाकायदा टेंडर जारी किए जाते हैं। इस बार काम कितना बड़ा होगा, यह आप इससे समझ सकते हैं कि जहां वर्ष 2012-13 में 1000 के 4.5 करोड़ नोट नष्ट किए गए, लेकिन इस बार 1000 के 6.32 अरब नोटों को नष्ट करने की तैयारी करनी होगी। इसी तरह से उस वर्ष 500 रुपये के 22.63 करोड़ नोट नष्ट किए गए थे। जबकि इस बार हो सकता है कि 7.85 अरब नोटों को नष्ट करना पड़े। भारत में इस वर्ष कुल मिलाकर तकरीबन 25 अरब नोट नष्ट किए जाएंगे। आरबीआई को करनी होगी कड़ी मशक्कत पांच सौ और हजार के नोटों को आम जनता से वापस लेने के बाद उसे नष्ट करने में भी रिजर्व बैंक (आरबीआई) को मशक्कत करनी होगी। वैसे तो आरबीआई के लिए पुराने नोटों को नष्ट करने का काम कोई नया नहीं है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में उसने कभी नोटों को नष्ट नहीं किया है। बैंकों के अधिकारी मान रहे हैं कि अगले वर्ष की शुरुआत में जब प्रचलन से बाहर किए गए 500 व 1000 के नोटों को नष्ट करने का काम शुरू होगा, तो यह दुनिया में इस तरह का सबसे बड़ा अभियान होगा। भारत में तीसरा सबसे बड़ा नोटों का जखीरा भारत नोटों के प्रचलन के मामले में तीसरे नंबर पर है। चीन और अमेरिका को छोड़कर इतने नोट किसी भी बड़े देश में प्रचलन में नहीं हैं। चीन में 50 अरब नोट  प्रचलन में हैं, जबकि अमेरिका में इनकी संख्या 35 अरब के करीब है। रिजर्व बैंक का डाटा बताता है कि ब्रिटेन में तो महज तीन अरब और यूरोपीय संघ में 16 अरब नोट हैं।

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