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रक्षा बंधन पर “बोलो बे छोकरो”

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नाहन। ऐतिहासिक शहर नाहन में रक्षा बंधन का पर्व अनूठे तरीके से मनाया गया। नाहन में रक्षा बंधन पर रेशम की डोरी के साथ पतंग की डोरी भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते में अपना विशेष स्थान रखती है। इस ऐतिहासिक शहर में रक्षा बंधन के साथ आसमान में पतंग उड़ाने की परंपरा रियासत काल से चली आ रही है, जोकि आज भी जारी है। हालांकि समय के साथ-साथ पतंगबाजी में कुछ कमी जरूर आई हैं, लेकिन परंपरा आज भी कायम है। बरसों के चलते आ रहे भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में यहां पतंग की डोरी ने भी अपनी पक्की जगह बना ली है। नाहन में रक्षा बंधन के दिन पहले भाईयों ने अपनी बहनों से राखी बंधवाई और बाद में घर की छत्तों पर जाकर पतंग उड़ाने शुरू किए। यह सिलसिला पूरा दिन जारी रहा। शहर में रियासतकाल से ही पतंगबाजी की परंपरा चली आ रही है।

सिरमौर जिला जब एक रियासत थी, उस समय सिरमौर रियासत के राजा भी रक्षा बंधन पर पतंगबाजी करते थे। यही नहीं रियासत के दौरान पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती थी। पतंगबाजी के दौरान जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की पतंग को काटता, तो इस दौरान बोलो बे छोकरो काटे ओये के जुमले गूंज रहे थे। यह जुमला पतंगबाजी की परंपरा की तरह बेहद पुराना है, जोकि आज भी कायम है। कुल मिलाकर रियाससतकाल से चली आ रही रक्षा बंधन पर्व पर पतंगबाजी की परंपरा शहर के लोग आज भी निभा रहे हैं। हालांकि इस बार कोरोना की वजह से थोड़ी कमी जरूर देखी गई, लेकिन फिर भी अधिकतर घरों की छतों पर युवाओं के साथ-साथ बच्चों के अलावा महिलाओं ने भी पतंगबाजी का खूब आनंद उठाया।

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