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4 वर्षों में 170 आवेदनः घर बनाने के लिए जमीन मिली सिर्फ 7 परिवारों को

4 वर्षों में 170 आवेदनः घर बनाने के लिए जमीन मिली सिर्फ 7 परिवारों को

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मंडी।वर्ष 2014 में प्रदेश सरकार ने एक योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत उन परिवारों को जमीन देने का प्रावधान किया गया जो पूरी तरह से भूमिहीन है। ऐसे परिवारों को शहरी क्षेत्रों में घर बनाने के लिए 2 बिस्वा जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 3 बिस्वा जमीन देने का प्रावधान किया गया। सरकार की इस योजना के बाद मंडी जिला प्रशासन के पास 4 वर्षों में 1279 आवेदन आए। जिनमें से 170 आवेदन सही पाए गए और इनमें से मात्र 7 परिवारों को ही जमीन का आबंटन हो सका है। यह 7 परिवार सुंदरनगर उपमंडल के हैं और इन्हें वहां पर मौजूद सरकारी जमीन घर बनाने के लिए आबंटित कर दी गई है।

सबसे ज्यादा आवेदन सदर उपमंडल से आए हैं। यहां 96 परिवारों ने जमीन के लिए आवेदन किया है। बल्ह से 21, गोहर से 11, करसोग से 5, सुंदरनगर से 18, धर्मपुर से 3, जोगिंद्रनगर से 4 और सरकाघाट से 12 आवेदन प्रशासन के पास पहुंचे हैं। पधर और थुनाग उपमंडल से कोई आवेदन नहीं आया है। इन आवेदकों को घर बनाने के लिए जमीन मुहैया करवाना प्रशासन के लिए कड़ी चुनौती बन गया है।

डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि जिला में कहीं पर भी ऐसी सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है जो किसी उपयोग में नहीं आ रही हो और उसे ऐसे परिवारों को आबंटित किया जा सके। जो जमीन थी उसे आबंटित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वन भूमि को घर बनाने के लिए नहीं दिया जा सकता। फिर भी सरकार को इस संदर्भ में एक प्रस्ताव भेजा गया है यदि उसे स्वीकृति मिलती है तो फिर एफसीए की क्लियरेंस के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

सरकारी जमीन हथियाने के चक्कर में

भूमिहीनों को जमीन आबंटन की योजना का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। बहुत से ऐसे लोग भी सरकारी जमीन हथियाने के चक्कर में हैं जिनके पास पहले से जमीन उपलब्ध है। चार वर्षों में प्रशासन के पास 1279 आवेदन आए। 2014 में 599, 2015 में 263, 2016 में 156, 2017 में 181 और 2018 में 80 आवेदन प्रशासन के पास पहुंचे।

प्रशासन ने आने वाले आवेदनों की गहनता से जांच पड़ताल की तो पता चला कि 818 आवेदन ऐसे थे जो पूरी तरह से अपात्र पाए गए।कुछ लोग ऐसे थे जिनके पास पहले से कहीं न कहीं जमीन थी। और कुछ लोग ऐसे थे जिनके पिता के पास जमीन थी। डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि इस योजना के लिए जो मापदंड तय किए गए हैं उसी के तहत जो पात्र पाया जाएगा उसे जमीन उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी भी 284 आवेदन जांच के लिए लगाए गए हैं।

विभाग नहीं देना चाहते अपनी जमीन

जिला में बहुत से विभागों के पास जमीनें तो उपलब्ध हैं लेकिन विभाग उस जमीन को अपने इस्तेमाल का हवाला देते हुए इस योजना के लिए नहीं देना चाहते। विभागों की भी भविष्य में कार्य विस्तार की योजनाएं लंबित हैं ऐसे में जमीन देने से इन योजनाओं को धक्का लग सकता है। अब ऐसे में यह सरकार के लिए चिंता की बात है कि ऐसे पात्र परिवारों को जल्द से जल्द जमीन कैसे उपलब्ध करवाई जाए।

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