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Live: सेवाकाल बढ़ाने के मसले पर सीएम जयराम के जवाब से अंसतुष्ट विपक्ष, सदन में गहमागहमी

Live: सेवाकाल बढ़ाने के मसले पर सीएम जयराम के जवाब से अंसतुष्ट विपक्ष, सदन में गहमागहमी

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रविन्द्र चौधरी/ धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Himachal Pradesh Vidhansabha Winter Session) के छठे और अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान विधायक जगत सिंह नेगी ने सदन में सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) से पूछा कि वर्ष 2018 से अब तक कितने कर्मचारियों-अधिकारियों का सेवाकाल बढ़ाया गया (Extension of Service) है। इस पर सीएम जयराम ने कहा कि अब तक 12 कर्मचारियों का सेवाकाल बढ़ाया गया है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री (Leader of Opposition Mukesh Agnihotri)ने आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि ये सूचना सदन को गुमराह करने वाली है। नेता प्रतिपक्ष को आश्वस्त करते हुए सीएम ने कहा कि कर्मचारियों को रिम्प्लॉयमेंट दी है,एक्सटेंशन नहीं।

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सीएम जयराम ठाकुर ने कहा है कि उनकी सरकार ने कर्मचारियों और अधिकारियों को सेवा विस्तार देने का दुरूपयोग नहीं किया है। सीएम ने कहा कि उनकी सरकार में बीते दो साल में लगभग एक दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों को ही सेवा विस्तार दिया है। इसके विपरीत पूर्व कांग्रेस सरकार ने 1167 कर्मचारियों और अधिकारियों को सेवा विस्तार दिया गया था और इन पर 30 करोड़ रूपए खर्च किए गए थे। अग्निहोत्री ने पूछा कि यदि सीएम द्वारा दी गई सूचना गलत निकली तो वह अपनी सरकार को क्या दंड देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने पटवारियों को सरकार ने फिर से तैनाती दी है। सीएम ने कहा कि एक्सटेंशन और री-एंप्लाइमेंट में अंतर है और सरकार ने किसी को एक्सटेंशन नहीं दी है।


विधायक जगत सिंह, नेगी, विक्रमादित्य सिंह बिक्रम सिंह जरयाल और मोहन लाल ब्राक्टा के संयुक्त सवाल पर सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि पहली जनवरी 2018 से 31 जुलाई 2019 की अवधि में प्रदेश में 30814 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें बलात्कार के 544, हत्या के 136, डकैती के दो, एनडीपीएस के 2080, हत्या के प्रयास के 86, अपहरण के 732, दहेज हत्या के 5, महिलाओं पर अत्याचार के 317, महिलाओं की लज्जा भंग करने के 789, दंगा फसाद से 729, सडज़क दुर्घटनाओं को 4808, चोरी के 970, ठगी के 863, एससीएसटी एक्ट के 172, आबकारी अधिनियम के 4351, वन अधिनियम के 346, आईटी एक्ट के 98 और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के 58 मामले दर्ज किए गए। सीएम ने कहा कि इस अवधि में दर्ज अपराधों में सजा की दर, 43.48 फीसदी रही। भ्रष्टाचार के तहत दर्ज मामलों में सजा की दर 10.71 फीसदी रही। उन्होंने कहा कि पुलिस की सक्रियता के चलते अपराधियों पर शिकंजा कसा है, जिससे आपराधिक मामलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रयास कर रही है कि दर्ज आपराधिक मामलों का निपटारा जल्द हो, इसके लिए जहां प्रदेश में तीन परिवार अदालतें गठित की गई हैं, वहीं पोक्सो एक्ट के तहत भी तीन अदालतें गठित की गई हैं। इसी मुद्दे पर विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि संगीन अपराधों के निपटारे में तेजी लाई जानी चाहिए।

करूणामूलक आधार पर नियुक्तियों को लेकर विधायक अनिरूद्ध सिंह, सुखविंद्र सिंह सुक्खू, सुरेंद्र शौरी और रविंद्र कुमार के संयुक्त प्रश्न के उत्तर में सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि करूणामूलक आधार पर नियुक्तियां प्रदान करने के विभिन्न विभागों, निगमों और बोर्डों में 4040 मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि एक जनवरी 2018 से अभी तक 144 लोगों को करूणामूलक आधार पर नौकरी दी गई है। उऩ्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद सरकार ने 7 मार्च को संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिसके अनुसार करूणामूलक आधार पर रोजगार की नीति में संशोधन किए गए हैं। सीएम ने कहा कि करूणामूलक आधार पर नौकरी अधिकार नहीं है, लेकिन मानवीय आधार पर यह प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुल नौकरियों का पांच फीसदी कोटा करूणामूलक नौकरी के लिए रखा गया है। उन्होंने कहा कि नई नीति में सरकार ने 58 वर्ष तक किसी भी कर्मचारी की मौत होने पर करूणामूलक आधार पर नौकरी देने का प्रावधान किया गया है। पहले इसका प्रावधान 50 साल तक मौत होने पर ही था। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसमें आय सीमा में भी परिवर्तन किया है। इसके तहत अब 2.50 लाख रूपए की आय सीमा रखी है। जबकि पहले यह 1.50 लाख रूपए थी। उन्होंने कहा कि कुल लंबित 4040 मामलों में से 2303 तृतीय श्रेणी के और 1737 चतु्र्थ श्रेणी के हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकार ने वित्त विभाग के पास मामले भेजने की नीति को बदलकर अब विभागीय प्रशासनिक स्तर पर ही निपटाने का प्रावधान किया है।

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