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#Monsoon_Session : विस के सातवें दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष का हंगामा, सदन से Walkout

राजेंद्र राणा को अधिनियम 67 के तहत लैंड डील पर चर्चा की नहीं मिली अनुमति

#Monsoon_Session : विस के सातवें दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष का हंगामा, सदन से Walkout

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लेखराज धरटा/शिमला। हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र (#Monsoon_Session) के सातवें दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही आज सदन के बाहर ही उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब विपक्षी सदस्य अध्यक्ष के चैंबर के सामने बैठकर अपना रोष व्यक्त करने लगे। विपक्षी सदस्यों को मनाने के लिए संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज पहुंचे तो कुछ देर के लिए गर्मागर्मी होती रही। उसके बाद किसी तरह विपक्षी सदस्यों को मनाकर सदन के भीतर ले जाया गया। सदन में पहुंचते ही कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा (Rajendra Rana) ने अधिनियम 67 के तहत लैंड डील को लेकर चर्चा की मांग की, जिस पर अनुमति नहीं मिलने पर विपक्षी सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया। विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर आ गए।


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मानसून सत्र के सातवें दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष नियम 67 के तहत बेनामी सौदों के मुद्दों पर चर्चा मांगी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के मंत्री धड़ल्ले से प्रदेश में भूमि ख़रीद रहे हैं जबकि लैंडसिलिंग एक्ट के तहत एक व्यक्ति केवल 315 कनाल तक ही ख़रीदी जा सकती है परंतु प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने 1200 कनाल से भी अधिक भूमि ख़रीद रखी है। इस मुद्दे को लेकर सदन में प्रश्नकाल शुरू होने से पहले ही हंगामा हो गया और विपक्ष ने यह आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। उन्होंने कहा कि जब बीजेपी विपक्ष में थी तो उस समय यह कहती थी कि सत्ता में आते हैं हम बेनामी सौदों की जांच करवाएंगे परंतु सत्ता हासिल करते ही भाजपा के मंत्री बेनामी सौदों में सलिप्त पाए जा रहे हैं और जांच से सरकार पीछे हट रही है। विपक्ष बेनामी भूमि खरीद मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रही है और सरकार जांच से बच रही है और सदन में भी चर्चा से भाग रही है। विपक्ष ने सरकार से मंत्रियों और रिश्तेदारों द्वारा 3 साल में खरीदी गई जमीन का ब्यौरा मांगा, लेकिन सदन में चर्चा के लिए समय नहीं दिया गया जिससे नाराज हो कर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया है।

 

कांग्रेस नेता एवं सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि नियम 67 के तहत समय रहते विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस दे दिया गया था परंतु फिर भी विधानसभा अध्यक्ष ने नियम 67 को अनदेखा करते हुए प्रश्नकाल आरंभ करने के आदेश दिए। हर बार यह देखा जाता है कि विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास सदन में किया जाता है। विपक्ष के समय जब बीजेपी सरकार थी तब यही लोग बेनामी सौदों की जांच की बड़ी-बड़ी बातें किया करते थे परंतु सत्ता हासिल करते ही इन्हीं के मंत्री बेनामी सौदों में संलिप्त पाए जा रहे हैं। लैंड सीलिंग एक्ट के तहत एक व्यक्ति के पास अधिकतम 315 कनाल जमीन हो सकती है परंतु बीजेपी के मंत्रियों के पास 1200 कनाल जमीन फतेपुर में साल 2018 में खरीदी जाती है । 515 कनाल जमीन मंत्री के परिवार के नाम है तथा लगभग 700 कनाल जमीन उनके करीबी रिश्तेदारों के नाम है । देखने की बात यह है कि इतने बड़े बेनामी सौदों के पीछे है कौन सरकार इसकी पूरी जांच करें। इस विरोध के चलते विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।

उधर, स्पीकर के कार्यालय के बाहर विपक्ष के धरना देने की संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने निंदा की है। सुरेश भारद्वाज ने विपक्ष के रवैये की आलोचना की ओर कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के कमरे के बाहर विपक्ष का धरना देना निंदनीय है। ये विधानसभा की परंपराओं के ख़िलाफ़ है।

 

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