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स्वास्थ्य सेवाओं पर कटौती प्रस्ताव को लेकर विपक्ष का वॉकआउट

स्वास्थ्य सेवाओं पर कटौती प्रस्ताव को लेकर विपक्ष का वॉकआउट

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सरकार के मंत्रियों पर लगाया जवाब न देने का आरोप

Opposition WalkOut : शिमला। विधानसभा से आज विपभी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विपक्ष के कटौती प्रस्ताव पर सत्तापक्ष के विधायकों को हिस्सा लेने से नाराज विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया। सदन से बाहर जाने से पहले बीजेपी के सुरेश भारद्वाज ने कहा कि कटौती प्रस्ताव विपक्ष का है और इसमें मंत्री जवाब देने से कतरा रहे हैं और सत्तापक्ष के सदस्यों को भाग लेने का मौका दिया गया। यह नियमों के खिलाफ है और सत्तापक्ष सदन में नई प्रथा चलाने का प्रयास कर रहा है। इसलिए वे सदन से वॉकआउट कर रहे हैं। इस बीच, स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने कहा कि इस कटौती प्रस्ताव का जवाब वे विपक्ष के सामने ही देंगे। अभी विपक्ष के सदस्य सदन में नहीं हैं।

जबकि विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल ने कहा था कि स्वास्थ्य मंत्री चाहे तो चर्चा का जवाब आज ही दे सकते हैं। इससे पहले विपक्षी सदस्य महेंद्र सिंह ने कटौती प्रस्ताव पेश किया था और उनके समेत सभी सदस्यों ने चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार को घेरा, जबकि सत्तापक्ष के तीन सदस्यों ने सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए सरकार की तारीफ की। इससे पहले बीजेपी सदस्य महेंद्र सिंह ने आज विधानसभा में राज्य की चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस समय डॉक्टरों और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ के 10091 पद खाली हैं। इससे लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि केंद्र से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केंद्र से पैसा मिल रहा है, लेकिन फिर भी यहां स्वास्थ्य की सेहत ठीक नहीं हो रही है। सदन में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण को लेकर लाए गए कटौती प्रस्ताव पेश करते हुए बीजेपी सदस्य महेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य में तीन मेडिकल कालेज, कैंसर यूनिट और एम्स जैसे संस्थान राज्य को दिए हैं, लेकिन यहां की सरकार इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य को लेकर जो भी घोषणाएं की जा रही हैं, वह झूठी हैं और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की भर्तियां अनुबंध आधार पर की जा रही हैं। इसे लेकर सरकार की नीतियां ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में उपकरण तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाला कोई नहीं हैं। महेंद्र सिंह ने मंडी में गलत इंजेक्शन लगाने से गर्भवती महिला की हुई मौत के मामले को भी सदन में उठाया और कहा कि इससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का पता चलता है।

संस्थान तो खोले पर सुविधाएं नहीं
बीजेपी सदस्य महेश्वर सिंह ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि सरकार अधिक से अधिक स्वास्थ्य संस्थान खोल तो रही है, लेकिन वहां पर न तो डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है और न ही अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति हो रही है। उन्होंने कहा कि कुल्लू के जोनल अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं है। उन्होंने कहा कि वहां पर लैब टेक्नीशियन न होने से मशीनें बंद हैं। महेश्वर सिंह ने शिमला के केएनएच में बर्थ वेटिंग रूम न होने का मामला भी उठाया और जिलास्तर पर भी इसकी सुविधा की मांग की।
नहीं बनी कोई स्वास्थ्य नीति
चर्चा में हिस्सा लेते हुए बीजेपी सदस्य सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश में कोई भी स्वास्थ्य नीति नहीं बनी है। प्रदेश सरकार सिर्फ नए-नए स्वास्थ्य संस्थान खोल रही है। उन्होंने कहा कि अधिकांश पीएचसी, सीएचसी और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी है। उन्होंने कहा कि एम्स के हिमाचल में स्थापित करने का मामला पाइप लाइन में है और समय आने पर केंद्र सरकार इसका शिलान्यास करेगी। भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने 3 नए मेडिकल कालेज खोल दिए, जहां पर फैकल्टी नहीं मिल रहे। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि आईजीएमसी का स्टेटस बढ़ाया जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आईजीएमसी का स्तर गिरा रही है, जबकि होना यह चाहिए था कि इसका स्तर बढ़ाकर इसे स्वायत संस्थान बनाती। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कालेज में आपरेशन थियेटर में मरीजों से सामान मंगवाया जाता है, इसकी जांच होनी चाहिए। डॉ. बिंदल ने पीजीआई में तैनात कर्मचारी को ऐसी जगह पर बैठने की व्यवस्था करवाई जाए, जहां पर वह लोगों की पहुंच में हो और उसके केंद्र पर स्वास्थ्य बीमा योजना का बोर्ड डिस्प्ले करवा जाए। उन्होंने कैंसर रोगियों के लिए सरकार की योजनाओं का लाभ देने के लिए पीएचसी केंद्रों में बोर्ड पर सरकार की योजनाओं को दर्शाने को भी कहा। बेटी है अनमोल  और टीबी जैसी गंभीर बीमारी के निदान को लेकर उन्होंने जनसहभागिता की बात कही। उन्होंने कहा कि आरकेएस के तहत रखे कर्मचारियों के लिए नीति बनाई जाए और अनुबंध नीति को लागू करवाया जाए।

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