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आउटसोर्स भर्तियां एससी, एसटी और ओबीसी के अधिकारों का हनन

40 फीसदी आबादी को उठाना पड़ेगा नुकसान

आउटसोर्स भर्तियां एससी, एसटी और ओबीसी के अधिकारों का हनन

संजीव कुमार/गोहर। आउटसोर्स भर्तियों का सिलसिला चलता रहा तो सरकारी सेवाओं में संवैधानिक रोस्टर का प्रावधान कागजों में ही रह जाएगा, जिसके चलते प्रदेश में अनुसूचित जाति/ जनजाति और पिछड़े वर्ग की 40 फीसदी आबादी के संवैधानिक अधिकारों का हनन होगा। यह बात अनुसूचित जाति/ जनजाति सरकारी कर्मचारी कल्याण संघ के जिला अध्यक्ष दर्शन लाल ने कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आउटसोर्स भर्तियों से आरक्षण की व्यवस्था कागजों में रह जाएगी।

प्रदेश में विभिन्न विभागों में हजारों आउटसोर्स कर्मचारी रखे गए हैं। इसमें बिजली, शिक्षा और अन्य विभाग शामिल हैं। अब आईपीएच में हजारों की भर्तियां की जा रही हैं, जिसमें किसी तरह से संवैधानिक रोस्टर की व्यवस्था को अमल में नहीं लाया जा रहा है। इसके साथ हर विभाग में हजारों आउटसोर्स कर्मचारी रखने की प्रक्रिया चल रही है। सीधे तौर पर सरकार द्वारा आउटसोर्स की हजारों भर्तियों में आरक्षण नहीं देने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी विभागों में सरकार द्वारा कर्मचारी रखे जा रहे हैं तो संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत अनुसूचित जाति/ जनजाति वर्ग व अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों की सुरक्षा निश्चित की जानी चाहिए।

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