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ओजोन परत का संरक्षण जरूरी

ओजोन परत का संरक्षण जरूरी

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हर साल 16 सितंबर को पूरे विश्व में ओजोन परत संरक्षण दिवस मनाया जाता है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि धरती पर जीवन को पनपने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है। यह विरोधाभास ही कहा जाएगा कि जो हमारे जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है, उसे इंसान खुद मिटाने पर तुला हुआ है। प्रकृति का विनाश करते-करते आज इंसान ने खुद को प्रकृति के सामने वहां ला खड़ा किया है जहां प्रकृति उसका विनाश कर सकती है। लगातार जंगलों की कटाई असंतुलन पैदा कर रही है। गाड़ियों की बढ़ती तादाद ने हवा को प्रदूषित कर रखा है। वहीं, उस जल को भी इंसान ने नहीं बख्शा जो हमारा जीवन है और जिसके बिना हम जी नहीं सकते।

ozone-dayप्रौद्यौगिकी के इस युग में इंसान हर उस चीज का हरण कर रहा है जो उसकी प्रगति की राह में रोड़ा बन रहा है। अपनी सहूलियत और आराम के लिए अब तो इंसान ने उस ओजोन परत को भी नष्ट करने की ठान ली है जो उसे सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। बढ़ती हुई गतिविधियों से अब ओजोन परत को भारी खतरा हो गया है। गौरतलब है कि ओजोन परत सामान्यतः धरातल से 10 किलोमीटर से 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक पाई जाती है और यह धरती के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती है। कुछ इस तरह कि यह सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणों के लिए यह अच्छे फिल्टर का काम करती है।

ओजोन परत इस समय ध्रुवीय क्षेत्र में बहुत कम हो गई है इसका एक छिद्र अंटार्कटिका के ऊपर स्थित है। पराबैंगनी किरणों में रेडिएशन होता है और इसकी बढ़ती मात्रा से चर्म कैंसर, अल्सर तथा मोतियाबिंद जैसे रोग हो जाते हैं। शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इतना ही नहीं इसका असर जैव विविधता पर भी पड़ता है तथा कई फसलें नष्ट हो सकती हैं। पिछले कुछ दशकों में अध्ययन से पाया गया है कि इतनी महत्वपूर्ण ओजोन परत का धीरे-धीरे क्षय हो रहा है। पराबैंगनी किरणें मानवशरीर की कोशिकाओं की सहनशक्ति के बाहर होती हैं।

ozone-dayओजोन परत उसी से हमारी रक्षा करती है। अगर यह सुरक्षा कवच नहीं होता तो पृथ्वी भी अन्य ग्रहों की तरह जीवनहीन होती। ओजोन परत के क्षय की जानकारी 1960 में हुई और तब से इसे बचाने की लगातार कोशिशें हो रही हैं। धरती पर बढ़ती पेड़ों की कटाई से ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है। इसी की वजह से ओजोन अणुओं का बनना कम हो जाता है। हमें प्रकृति के साथ यह खिलवाड़ करना बंद करना होगा। वरना वह दिन भी दूर नहीं जब मानव भी विलुप्त हो जाएगा। मौजूदा हाल यह है कि ओजोन की क्षय वाला भूक्षेत्र स्थिर रूप से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ओजोन परत क्षय अपने सबसे बुरे स्तर पर पहुंच जाएगा। फिलहाल इस समय ओजोन परत अपने सबसे संवेदनशील अवस्था में है और इसे बचाने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है।

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