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Himachal को गेहूं बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में कृषि विश्वविद्यालय की बड़ी सफलता

Himachal को गेहूं बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में कृषि विश्वविद्यालय की बड़ी सफलता

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पालमपुर। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (Palampur Agriculture University) के प्रयासों से हिमाचल (Himachal) को गेहूं बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। कुलपति प्रो. अशोक कुमार सरयाल ने बताया कि पिछले तीन वर्ष में संचालित योजना के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। चालू रबी सीजन के दौरान विश्वविद्यालय मुख्य परिसर में अपने बीज उत्पादन फार्म से लगभग 300 क्विंटल प्रजनक उन्नत बीजों की फसल लेने की उम्मीद कर रहा है। यह 2016 में पैदा होने वाली मात्रा का लगभग दोगुना होगा।

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कुलपति प्रोफेसर अशोक कुमार सरयाल ने कहा कि विश्वविद्यालय का बीज विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग पांच गेहूं (Wheat) की किस्मों का ब्रीडर बीज तैयार कर रहा है, जिनमें एचपीडब्ल्यू 236, एचपीडब्ल्यू 249, एचपीडब्ल्यू 349, एचपीडब्ल्यू 360 (हिम पालम गेहूं-1) और एचपीडब्ल्यू 368 (हिम पालम गेहूं-2) राज्य में गेहूं के 3.50 लाख हेक्टेयर कुल क्षेत्र में खेती के लिए अनुशंसित हैं। इन उच्च उपज देने वाली किस्मों की उत्पादकता सिंचित क्षेत्रों में 40-45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और वर्षा आधारित क्षेत्रों में 25-28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसके अलावा इनमें अच्छी गुणवत्ता और पीले रतुए के प्रति प्रतिरोधी गुण भी हैं। विश्वविद्यालय में इस इस समय बीज उपज 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त की जा रही है। प्रदेश में स्थित अन्य अनुसंधान केंद्रों में वर्तमान सीजन में कुल 600 क्विंटल ब्रीडर बीज के उत्पादन का अनुमान है।

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18000 क्विंटल सीड का उत्पादन करने के लिए 600 क्विंटल ब्रीडर सीड उगाएगा

प्रोफेसर सरयाल ने कहा कि ब्रीडर बीज वैज्ञानिकों द्वारा उत्पादित किया जाता है, इसलिए इसकी शुद्धता प्रतिशतता ज्यादा होती है और भारतीय न्यूनतम बीज मानकों से भी ऊपर 85 प्रतिशत से अधिक इनका अंकुरण होता है। ब्रीडर बीज गुणवत्ता में उच्च लेकिन मात्रा में कम उत्पादित होता है। इस प्रकार यह बीज वैज्ञानिकों और टेक्नोक्रेट्स की देखरेख में राज्य कृषि विभाग अपने खेतों पर फाउंडेशन सीड को मात्रा में बढ़ाता है। कांगड़ा (Kangra) में राज्य कृषि विभाग ने पिछले साल प्रमाणित गेहूं बीज उत्पादन के लिए 450 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान की थी। अगले रबी सीजन में कृषि विभाग के सहयोग से विश्वविद्यालय लगभग 18000 क्विंटल सीड का उत्पादन करने के लिए 600 क्विंटल ब्रीडर सीड उगाएगा। किसान अपने फार्म में तीसरे और अंतिम चरण में प्रमाणित बीज का उत्पादन करने के लिए आधार बीज को कई गुना बढ़ा पाएगा और इसके लिए किसानों का सीड सर्टिफिकेशन एजेंसी (Seed Certification Agency) के साथ पंजीकरण किया जाएगा। प्रदेश के लिए 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के औसत उत्पादन के साथ 5.40 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है जो गेहूं के तहत राज्य के 3.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 40 प्रतिशत बीज प्रतिस्थापन दर पर कुल 1.40 लाख क्विंटल की आवश्यकता से चार गुणा अधिक है।

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अन्य राज्यों को भी की जा सकती है आपूर्ति  

कुलपति (VC) ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा उत्पादित बीज में ना केवल राज्य के प्रमाणित बीज की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता है, बल्कि राजस्व प्राप्ति के लिए अन्य राज्यों को भी इसकी आपूर्ति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों को भी बीज उत्पादन से लाभ होने की संभावना है। क्योंकि बीज की फसल अनाज की फसलों की तुलना में अधिक कीमत देती है, जोकि खरीद मूल्य से ही स्पष्ट हो जाता है। अनाज की फसल का खरीद मुल्य 1925 रुपए प्रति क्विंटल जबकि फाउंडेशन सीड और प्रमाणित बीज का खरीद मूल्य राज्य सरकार द्वारा 2500 से 2600 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इस तरह अधिक फसल उत्पादन व उन्नत बीज से किसान को 600-700 रुपए प्रति क्विंवटल अधिक आय मिलेगी। प्रोफेसर सरयाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए 10 करोड़ रुपए की जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा वित्त पोषित योजना के साथ अगले साल सब्जी की फसल के लिए 75 हेक्टेयर भूमि पर गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तैयार किया जाएगा जो हिमाचल प्रदेश में सब्जी उत्पादन हेतु गुणवत्तापूर्ण बीज की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होगा।

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