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राष्ट्रीय जीवन की रीढ़ पंचायती राज संस्थाएं

राष्ट्रीय जीवन की रीढ़ पंचायती राज संस्थाएं

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panchayati-raj-system: लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई पंचायती राज संस्थाओं का देश को आगे ले जाने में अहम भूमिका रही है। अगर लोकतंत्र यही इकाई मजबूत व विकसित होगी तो जाहिर है कि देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था अस्तित्व में रही है। इसे कमोबेश मुग़ल काल तथा ब्रिटिश काल में भी जारी रखा गया। उस समय की पंचायतों को समिति एवं सभा कहा जाता था जो कभी परिषद के रूप में सामने आती थीं, कभी निगम के रूप में प्रस्तुत होती थीं, कभी पौर जनपद संस्था के रूप में सम्मानित होती थीं और आज पंचायत के रूप में ग्राम-ग्राम में प्रसार पा कर जनता की भलाई के लिए कार्य कर रही हैं।

पंचायती राज संस्थाएं भारत के ग्रामीण  विकास में जो सहयोग प्रदान कर रही हैं, वह किसी भी प्रकार कम नहीं है। पंचायतें हमारे राष्ट्रीय जीवन की रीढ़ है, जिस पर सम्पूर्ण शासन व्यवस्था आधारित है। वर्तमान समय में पंचायती राज व्यवस्था की अत्यधिक उपयोगिता है। इसीलिए इसे अनेक अधिकार, साधन और जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।


panchayati-raj-system: प्रजातान्त्रिक राज व्यवस्था को ठोस आधार देने में महत्त्वपूर्ण

पंचायती राज व्यवस्था भारत में प्रजातान्त्रिक राज व्यवस्था को ठोस आधार प्रदान करती है, जिसके कारण शासन जनता द्वारा संचालित होता है और ग्रामवासियों की भी शासन व्यवस्था के प्रति रुचि जागृत होती है। केंद्रीय एवं राज्य सरकारों की समस्याओं को ये संस्थायें काम करती हैं क्योंकि शासकीय शक्तियों एवं कार्यों का विकेन्द्रीयकरण होता है, जिसके कारण शासकीय सत्ता गिने-चुने लोगों के हाथ में न रहकर पंचायती कार्यकर्ताओं के हाथ में पहुंच जाती है। पंचायतें प्रजातन्त्र की प्रयोगशालाएं होती हैं जो राजनीतिक अधिकारों के लिए नागरिकों को शिक्षा देती हैं, साथ ही उनमें नागरिक गुणों का विकास करती हैं।

हमारी ग्रामीण जनता पंचायती राज व्यवस्था के कारण शासन के बहुत करीब पहुंच जाती है परिणामस्वरूप जनता एवं शासन में एक-दूसरे की समस्याओं को समझने व उसके समाधान हेतु भावनाएं उत्पन्न होती हैं और ग्रामीण उत्थान संभव होता है। पंचायतों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी स्थानीय समाज और राजनीतिक व्यवस्था के बीच कड़ी हैं। इन लोगों के सहयोग के बिना सरकारी अधिकारियों का काम भी मुश्किल है जाता है । भारत का भावी नेतृत्व करने हेतु ये अत्यंत सुदृढ एवं शक्तिशाली संस्थायें हैं विधायकों एव मंत्रियों को प्राथमिक अनुभव और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं, जिससे वे ग्रामीणजनता  की समस्याओं से अवगत होते हैं।

सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व्यवस्थाओं के लिए भी जरूरी

पंचायती व्यवस्था ने देश की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश को आधुनिकीकरण की ओर अग्रसर किया है तथा भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में की उपस्थिति ने ग्रामीण जनता को जागरुकता प्रदान की है। पंचायती राज का दूरगामी प्रभाव यह हुआ कि ग्रामीण राजनीति मे गतिशीलता एवं बढ़ गई।

ऐसी व्यवस्था की गई, जिससे गांवों के सरपंच अपने अधिकारों का प्रयोग न्यायों एवं दूरदर्शिता के साथ कर सकेंगे एवं राजनीतिक अनुशासन को बनाये रखेंगे। पंचायती राज व्यवस्था में व्याप्त विष को काबू करने के लिए वास्तविक सत्ता संपन्न लोकतांत्रित स्थानीय संस्थाओं की स्थापना आवश्यक है क्योंकि वर्तमान व्यवस्था का लोकतांत्रिक स्वरूप प्राय: लुप्त होता जा रहा है। अत: प्रशासनिक तनाव को समाप्त करना अत्यावश्यक है ।

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