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Pandit Bal Krishna Sharma का जन्मदिवस 21 को उपकार दिवस के रूप में मनेगा, विभिन्न कार्यक्रम होंगे Organized

Pandit Bal Krishna Sharma का जन्मदिवस 21 को उपकार दिवस के रूप में मनेगा, विभिन्न कार्यक्रम होंगे Organized

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कांगड़ा। समाजसेवी पंडित बाल कृष्ण शर्मा का 74वां जन्मदिवस 21 जनवरी (रविवार) को हर वर्ष की तरह इस मर्तबा भी उपकार दिवस के रूप में मनाया जाएगा। श्री बालाजी अस्पताल परिसर में सुबह 10 बजे से 1 बजे तक बालाजी विहार सभा के तत्वावधान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। कार्यक्रम के बाद दोपहर1 से 3 बजे तक धाम का भी आयोजन होगा। श्री बालाजी अस्पताल कांगड़ा के एमडी डॉ राजेश शर्मा ने कहा है कि पंडित बाल कृष्ण शर्मा ने जीवन भर समाजसेवा की, हम उन्हीं के बताए रास्ते पर चलते हुए उनके जन्मदिवस को उपकार दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंडित बाल कृष्ण हमेशा कहा करते थे कि हमे हमेशा इस बात का प्रयास करना चाहिए कि जरूरतमंद की जितनी हो सके सेवा की जाए। पंडित बालकृष्ण शर्मा जी का जन्म जिला ऊना के लौहारा गांव में पंडित जय राम शर्मा के यहां 22 जनवरी 1944 को हुआ। सच मायनों में यह गांव उसी दिन गौरवान्वित हुआ क्योंकि आगे चलकर प्रसिद्धि की पराकाष्ठा इसी बालक के हिस्से में आई।

कालांतर में उनके पिता लौहारा गांव से कांगड़ा आए और यहां उन्होंने छोटे स्केल पर बर्तनों का व्यपार शुरू किया। यहीं के जीएवी स्कूल में पंडित जी की शिक्षा हुई और मैट्रिक के बाद उन्होंने पिता जी और भाईयों के साथ मिलकर कारोबार संभाल लिया। विभिन्न प्रतिभाओं के धनी शर्मा जी को अपनी पहचान बनाने में देर नहीं लगी। हालांकि शुरुआत भले ही जीरो ग्राउंड से हुई थी, पर देखते ही देखते पूरे कारोबार का परिदृश्य ही बदल गया। सन 1972 में वे निर्विरोध नगर परिषद के सदस्य चुने गए। सफर जारी रहा 1975 से 2007 तक पंडित बाल कृष्ण शर्मा नगर परिषद के चार बार प्रधान व तीन बार उप प्रधान चुने गए। रोचक यह कि वे कभी कोई चुनाव नहीं हारे। ऐसा लगा जैसे उनका व्यक्तित्व सिर्फ जीत के लिए ही बना था। वे गुप्त गंगा धाम के प्रधान भी बने।

सन 1984 से 2007 तक वे हॉकी, क्रिकेटऔर बालीवॉल के जिला प्रधान रहे तथा जूडो-कराटे के उप प्रधान भी रहे। पूरे 22 वर्ष तक बतौर दशहरा कमेटी के प्रधान, कांगड़ा में रामलीला का सफलता पूर्वक संचालन उन्हीं की देखरेख में हुआ। अपने प्रमुख कार्यों में उन्होंने समाजसेवा को प्रधानता दी। दीन दुखियों की मदद, गरीब विधवाओं को पेंशन और गरीब कन्याओं के विवाह के लिए आर्थिक मदद देकर उन्होंने सभी का दिल जीत लिया। 9 सितंबर, 2007 को यह महान विभूति हमारे बीच नहीं रही, पर जो आदर्श पंडित बालकृष्ण शर्मा ने स्थापित किए वे मील का पत्थर साबित हुए हैं।

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