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अपने बच्चों को चाह कर भी पोर्न देखने से नहीं रोक सकते पेरेंटस

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में हुआ खुलासा

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नई दिल्ली।किशोरावस्था एक ऐसी अवस्था होती है जिसमें बच्चा विपरीत योनि की तरफ सबसे ज्यादा आकर्षित होता है। ऐसे में बच्चे इस उम्र में सबसे अधिक पोर्न देखने में रुचि लेते हैं। आजकल पैरेंटस अपने बच्चों को पोर्न देखने से रोकने के लिए पैरेंटल कंट्रोल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अगर आप भी ये सोचते हैं कि इन इंटरनेट फिल्टरिंग टूल्स की मदद से आप अपने किशोर बच्चे को ऑनलाइन पोर्न देखने से रोक सकते हैं तो आप गलत हैं।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन में पाया गया कि आज के दौर में फिल्टरिंग टूल्स काफी लोकप्रिय हैं और चलन में भी हैं पर अभी तक यह नहीं तय हो पाया है कि वे प्रायोगिक तौर पर कितने प्रभावी हैं। सोचना यही है कि फिल्टरिंग टूल्स का असर कितना होता है। बता दें कि ये फिल्टरिंग टूल्स काफी मंहगे होते हैं और इन्हें मेंटेन करना भी काफी मुश्किल होता है। इसके अलावा नए शेयरिंग कंटेंट के साथ इन्हें अंडर ब्लॉक भी किया जा सकता है।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि आखिर कितने घरों को इसकी जरूरत है कि वे अपने बच्चों को ऑनलाइन पोर्नोग्राफी देखने से रोक सकें।अध्ययन में पाया गया कि ज्यादा घरों को इसकी जरूरत नहीं थी। रोचक यह भी था कि इंटरनेट फिल्टरिंग का भी कोई खास प्रभाव नहीं देखा गया। संभवतः इस पर अभी और रिसर्च होना आवश्यक है जो फिल्टरिंग को प्रभावी बना सके। जिससे बच्चों को पोर्न देखने से प्रभावी रूप से रोका जा सके।

 

 

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