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टॉप से फिसड्डी की श्रेणी में पहुंचा प्रदेश

टॉप से फिसड्डी की श्रेणी में पहुंचा प्रदेश

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शिमला। वर्ष 2011-12 में हिमाचल प्रदेश वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के वार्षिक आकलन में प्रथम था, लेकिन अब चार साल बाद प्रदेश इसी श्रेणी में फिसड्डी बनकर रह गया है। पहले स्थान पर रहने वाला प्रदेश अब खिसककर 17वें स्थान पर पहुंच गया है और यह सब प्रदेश की कांग्रेस सरकार की नाकामी का जीता जागता उदाहरण है। यह शब्द प्रदेश भाजपा सचिव और मीडिया प्रमुख प्रवीण शर्मा ने जारी बयान में कहे। प्रवीण शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के इन चार वर्षों में विकास के सभी मानकों में पिछड़ रहे हिमाचल के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और नहीं हो सकती है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा ईज़ ऑफ डूईंग बिजनेस के वार्षिक आंकलन में प्रदेश लगातार दूसरे वर्ष भी पिछड़ते हुए 17वें स्थान पर फिसल गया है।

  • mukesh-agnihotriप्रदेश भाजपा सचिव ने लगाया आरोप
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा ईज ऑफ डूईंग बिजनेस की रिपोर्ट का दिया हवाला
  • उद्योग मंत्री से पूछा, इन्वेस्टर मीट में करोड़ों रुपए खर्च करने का क्या मिला लाभ

भाजपा सचिव ने कहा कि उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री द्वारा उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल व प्रदेश में हो रहे भारी निवेश के झूठे दावों की पोल केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी की गई आंकलन रिपोर्ट में खोल कर रख दी है। प्रदेश सरकार विशेषकर, उद्योग विभाग की अक्षमता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि वर्ष 2011-12 में इसी श्रेणी में प्रथम रहने वाला प्रदेश अब पिछड़कर फिसड्डी राज्यों की श्रेणी में पहुंच गया है, वहीं पड़ोसी राज्य उत्तराखंड पिछले वर्ष के 23वें स्थान से 9वें स्थान पर पहुंच गया है। भाजपा सचिव ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश लाने के नाम पर मुंबई, अहमदाबाद, बंग्लूरू व नई दिल्ली में आयोजित इन्वेस्टर मीट पर करोड़ों रुपए फूंके गए। उस दौरान मुख्यमंत्री के बार-बार आग्रह के बावजूद प्रदेश में निवेश में बढ़ौतरी तो दूर, पूर्व की तुलना में निवेश लगातार घट रहा है।

कांग्रेस सरकार के इन चार वर्षों में 12571 करोड़ रुपए का निवेश प्रदेश में हुआ, जिसमें 2470 औद्योगिक ईकाइयों की स्थापना के साथ 24 हजार लोगों को रोजगार मिलने का दावा प्रदेश सरकार द्वारा किया गया, वहीं पूर्व भाजपा सरकार के पहले चार वर्षों की अवधि के दौरान 24,760 करोड़ रुपए के निवेश के साथ 4857 औद्योगिक ईकाइयां स्थापित हुई थी, जिसमें 60 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिला था। भाजपा प्रदेश सचिव ने कहा कि उद्योग मंत्री को प्रदेश की जनता को यह जवाब देना चाहिए कि इन्वेस्टर मीट के नाम पर करोड़ों रुपए फूंकने के बाद भी हिमाचल औद्योगिक निवेश और कारोबार के लिए उपयुक्त माहौल के मामले में क्यों पिछड़ रहा है और भाजपा कार्यकाल के दौरान इन्वेस्टर मीट आयोजित न होने के बावजूद अब की तुलना में लगभग दोगुना निवेश और तीन गुना नौकरियां ज्यादा कैसे मिली थीं।

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