यहां पीसीआर लैब है माईक्रोबायोलॉजिस्ट नहीं, कैसे जाचेंगे स्वाइन फ्लू के सैंपल

मंडी अस्पताल से शिमला भेजे जा रहे सैंपल, तीसरे दिन आ रही रिपोर्ट

यहां पीसीआर लैब है माईक्रोबायोलॉजिस्ट नहीं, कैसे जाचेंगे स्वाइन फ्लू के सैंपल

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मंडी। जिला में इस साल अभी तक स्वाइन फ्लू के कारण तीन लोगों की मौत हो चुकी है और तीन लोग इसकी चपेट में आने के बाद शिमला में अपना उपचार करवा रहे हैं। जिला में आलम यह है कि स्वाइन फ्लू के संभावित मरीज की रिपोर्ट तीसरे दिन प्राप्त होने के बाद पता चल रहा है कि मरीज को स्वाइन फ्लू है। कारण है जोनल अस्पताल मंडी में माईक्रोबायोलॉजिस्ट का न होना। नेरचौक मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद जोनल अस्पताल मंडी से माईक्रोबायोलॉजिस्ट भी रूखसत हो गए, जिस कारण लाखों की लागत से स्थापित की गई पीसीआर लैब वीरान हो गई है।

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स्वाइन फ्लू के टेस्ट करवाने की सुविधा तो है लेकिन विशेषज्ञ न होने के कारण यह सुविधा असुविधा में तबदील हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल कालेज नेरचौक में इस वक्त चार से पांच माईक्रोबायोलॉजिस्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन यहां पर पीसीआर लैब ही नहीं है और दूसरी तरफ जहां लैब है वहां विशेषज्ञ ही नहीं है। जिला के डॉक्टरों को स्वाइन फ्लू का जो भी संभावित मरीज लग रहा है उसका सैंपल लेकर जांच के लिए शिमला भेजा जा रहा है जिसकी तीसरे दिन रिपोर्ट प्राप्त हो रही है और उसके बाद पता चल रहा है कि मरीज को स्वाइन फ्लू है या नहीं।

सीएमओ डॉ. जीवानंद चौहान ने बताया कि माईक्रोबायोलॉजिस्ट का पद खाली होने की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने मेडिकल कालेज नेरचौक से डेपुटेशन पर विशेषज्ञ भेजने का भरोसा दिलाया है और विशेषज्ञ के आते ही लैब शुरू कर दी जाएगी। बता दें कि मंडी जिला में इस वर्ष अभी तक तीन लोग स्वाइन फ्लू के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं और तीन लोग शिमला में उपचाराधीन हैं। मरने वालों में दो बल्ह के और एक करसोग उपमंडल का बताया जा रहा है जबकि जो उपचाराधीन हैं उनमें एक बालीचौकी, एक बलद्वाड़ा और एक करसोग का मरीज शामिल है। सीएमओ मंडी डॉ. जीवानंद चौहान ने बताया कि इन सभी के घरों पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जाकर परिजनों और संपर्क में आए लोगों को दवाएं वितरित कर दी हैं और सभी से एहतियात बरतने को कहा गया है।

 

 

 

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