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औषधीययुक्त खीर खाने लंबलू में उमड़ी भीड़, दमा, खांसी से मिलती है निजात

औषधीययुक्त खीर खाने लंबलू में उमड़ी भीड़, दमा, खांसी से मिलती है निजात

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हमीरपुर। लंबलू स्थित मंदिर में शरद पूर्णिमा के अवसर पर बनाई आयुर्वैदिक दवा मिली खीर को खाने के लिए सोमवार सुबह भारी संख्या में लोग उमड़े। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा के अवसर पर बनाई गई इस खीर में मिलाई गई जड़ी- बूटियों का सेवन करने से दमा, खांसी, अस्थमा, पुरानी एलर्जी की बीमारी से निजात मिलती है। हमीरपुर के लंबलू में शरद पूर्णिमा की रात को आयुर्वैदिक दवा युक्त तैयार खीर खाने के लिए साल भर लोग इंतजार करते है और यही कारण है कि आज सुबह से ही मंदिर में भीड़ जमा हो गई। खीर खाने के लिए पूरे प्रदेश ही नहीं बाहरी राज्यों से भी लोग लम्बलू में पहुंचे।

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गौरतलब है कि पिछले 21 साल से इस तरह शरद पूर्णिमा के अगले दिन आयुर्वेदिक दवा मिला कर खीर दमा, खांसी, एलर्जी के मरीजों को खीर खिलाई जाती है और इस का सेवन करने के तुरंत बाद लाभ मिलना शुरू होता है। यही कारण है कि हर साल शरद पूर्णिमा के अगले दिन भारी तादाद में मरीज यहां पहुंचते है। माना जाता है कि दमा रोगियों के लिए तो यह खीर रामबाण का काम करती है। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन बनाई गई खीर का अपना महत्व है और खीर को बनाकर पूरी रात भर चांद की रोशनी में रखा जाता है व जो ओस इस खीर पर आकर गिरती है, वह काफी लाभकारी मानी जाती है। बाद में खीर में जड़ी बूटियों से बनाई गई औषधीय दवा मिलाई जाती है।

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. त्रिलोक शर्मा ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात को खीर रात भर चांद की रोशनी में रखी जाती है और दूसरे दिन सुबह से ही खीर में दवाई मिलाकर मरीजों को खिलाई जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले बीस साल से दवाई मरीजों को दी जा रही है और इसे खाने से काफी हद तक स्वास्थ्य लाभ मिलता है। मंदिर में पहुंचे दमा के मरीजों ने बताया कि कई साल से खीर का सेवन करते आ रहे है और खीर में मिली दवाई का सेवन करने के लिए बीमारी से निजात मिलती है। उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा के अगले दिन मंदिर आना नहीं भूलते है क्योंकि दवाई का सेवन साल भर बीमारी से दूर रखता है।

 

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