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स्वास्थ्य सुविधाओं के हालः नेरवा में तीन साल से खराब पड़ी दांत निकालने की Machine

स्वास्थ्य सुविधाओं के हालः नेरवा में तीन साल से खराब पड़ी दांत निकालने की Machine

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नेरवा। स्थानीय अस्पताल मात्र नाम का ही सिविल अस्पताल है, लेकिन अस्पताल के अंदर सुविधाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी हैं। अस्पताल के अंदर दांतों को निकालने वाली मशीन पिछले तीन सालों से खराब पड़ी है, जिससे की नेरवा में आ रहे दंत मरीजों को काफी परेशनियों का सामना करना पड़ रहा है। नेरवा अस्पताल 25 पंचायतों का केंद्र बिंदू है। यहां हर रोज 250 से अधिक ओपीडी होती हैं, जिसमें की हर रोज 30 से 35 मरीज अपने दांतों की जांच करवाने वाले होते हैं, लेकिन अस्पताल में मशीन खराब होने के कारण इन लोगों को प्राइवेट क्लीनीकों में जाना पड़ रहा है, जहां पर प्राइवेट क्लीनिक वाले उन से मुह मांगे दाम वसूल रहे हैं। दांतों में आरसीटी करवाने का 800 फीलिंग करवाने का 500 व दांत निकालने का 300 रुपये ले रहे हैं, जिसमें की गरीब आदमी अपना इलाज करवाने में असमर्थ है। उधर, दंत चिकित्सक नेरवा डॉ. गुलाब का कहना है कि यह मशीन दस साल पुरानी है, जिसको बदलवाने के लिए एमओ नेरवा डॉ. भरत भूषण के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग शिमला को अर्जी भेजी है।

इंदौरा में मेडिकल करवाने वालों को उठानी पड़ रही परेशानी

डमटाल। इंदौरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल करवाने वाले लोग डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण काफी परेशान हो रहे हैं और उनको मेडिकल करवाने के लिए नूरपुर का रुख अपनाना पड़ रहा है। इंदौरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल करवाने वाले मनोज कुमार, राजीव कुमार, दमन कुमार, रेखा देवी, रमन कुमार, लाल सिंह, हर्ष, राजेश कुमार व ब्रिज मोहन आदि ने बताया कि मेडिकल सही समय न होने के कारण उनके कामों में देरी हो रही है। इंदौरा में डॉक्टर की अनुपस्थिति के चलते अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता है और उन्हें मजबूरन नूरपुर में अपने इलाज के लिए जाना पड़ता है।

लोगों ने सरकार से आग्रह किया है कि इंदौरा के अस्पताल में सुचारू ढंग से डॉक्टर अपनी ड्यूटी दें अन्यथा ऐसा न करने वाले डॉक्टरों को यहां से बदला जाए।वहीं, इंदौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉक्टर कपिल शर्मा ने बताया कि अस्पताल में पूरे स्टाफ के न होने के चलते यह परेशानी सामने आ रही है। क्योंकि इंदौरा के अस्पताल में ईएनटी डॉक्टर का पद रिक्त पड़ा हुआ है और आंखों वाले चिकित्सक छुट्टी पर हैं। फिर भी लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखा जाएगा और अगर कोई चिकित्सक अनुपस्थित रहता है या स्टाफ का काम संतोषजनक नहीं है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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