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रास्ता नहीं तो वोट नहीं: लोगों ने #Panchayat_Election के बहिष्कार का किया ऐलान- जानिए पूरा मामला

73 वर्ष के बाद भी ग्राम पंचायत टक्का के लोग एक रास्ते को तरसे

रास्ता नहीं तो वोट नहीं: लोगों ने #Panchayat_Election के बहिष्कार का किया ऐलान- जानिए पूरा मामला

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ऊना। भौगोलिक परिस्थितियों में बेहद चुनौतीपूर्ण हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में जहां सरकार द्वारा तमाम सुविधाएं जुटाए जाने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं, प्रदेश के मैदानी जिला ऊना (Una) के तहत जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत टक्का में करीब 200 की आबादी आज भी एक अदद रास्ते (Road) को तरस रही है। हालत यह है कि देश को आजाद हुए 73 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इस मोहल्ले के बाशिंदों के लिए आजादी के कोई मायने नहीं रह जाते हैं। बरसात के दिनों में यदि मोहल्ले में कोई बीमार हो जाए और उसे लेने एंबुलेंस घर पहुंची हो तो उस एंबुलेंस को भी धक्का लगा कर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। नेताओं के चुनावी वादों से आजिज आज चुके यहां के बाशिंदों ने इस बार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव (Panchayat_Election) का बहिष्कार (Boycott) करने का ऐलान कर डाला है। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि यदि उन्हें रास्ता नहीं मिलेगा तो वह किसी को भी अपना वोट (Vote) नहीं देंगे।

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ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के 73 वर्ष बीत जाने के बाद भी जहां देश भर में भारी तरक्की का ढिंढोरा पीटा जाता है। वहीं, जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर बसे इनके मोहल्ले को आज तक रास्ता नसीब नहीं हो पाया है। चुनावी दिन नजदीक आते ही नेता इन लोगों के पास आते हैं लोक लुभावने वादे कर इनके वोट हासिल करके लौट जाते हैं, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद इनकी समस्या भी रात गई बात गई जैसी हो जाती है। प्रशासनिक अधिकारियों (Administrative officer) के दरबार पर कई बार यह लोग अपनी समस्या लेकर पहुंचे, लेकिन वहां पर भी तकनीकी कारणों का हवाला देकर इन्हें लौटा दिया जाता रहा है। कुल मिलाकर एक अदद रास्ते को तरस रहे इस मोहल्ले के बाशिंदों को सिवाय आश्वासन के और कुछ नहीं मिल पाया है। वहीं गुस्से से लबरेज ग्रामीणों ने नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के इस रवैया से तंग आकर इस बार चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान कर डाला। ग्रामीणों ने दो टूक कहा है कि जब तक उनके लिए एक रास्ते का निर्माण नहीं होता तब तक वह किसी को अपना वोट नहीं देंगे।


ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में उन्हें अपने घरों तक पहुंचना भी एक चुनौती बन जाता है। भारी बारिश के दौरान यदि कोई बीमार हो जाए और उसे लेने एंबुलेंस घर तक पहुंची हो तो एंबुलेंस को घर से सड़क तक पहुंचाने के लिए सभी लोगों को धक्का लगाना पड़ता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई पंचायतें आई और चली गई लेकिन उनकी समस्या सामने आते ही हर कोई हाथ खड़े कर देता था। ऐसे में अब नेताओं की समस्या पर ग्रामीणों के भी हाथ खड़े हो चुके हैं और वह इस बार कोई वोट पोल नहीं करेंगे। वहीं एडीसी ऊना (ADC Una) डॉ. अमित शर्मा ने कहा कि उनके ध्यान में अभी यह मामला आया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ग्रामीणों की समस्या को जानने के लिए जाएगा और उसके शीघ्र समाधान का प्रयास किया जाएगा।

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