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हल्के में ना लें कोरोना के हल्के लक्षण, नहीं तो खराब हो जाएंगे आपके फेफड़े

ब्रिटेन में किए एक छोट से पायलट अध्ययन में हुआ खुलासा

हल्के में ना लें कोरोना के हल्के लक्षण, नहीं तो खराब हो जाएंगे आपके फेफड़े

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लंदन। कोरोना (Corona) की पहली दो लहरों में यह वायरस जितना घातक दिखता था, अब उतना नहीं है। अब यह धीरे-धीरे इनसान के शरीर (Body) को नुकसान पहुंचा रहा है। कोविड के शुरुआत में इसके गंभीर लक्षण दिख रहे थे और शरीर के किस हिस्से को डैमेज कर रहा है पता चल जाता था। इसके विपरीत अब हल्के कोविड (Covid) संक्रमण वाले लोगों के फेफड़ों को हानि पहुंचने की संभावना ज्यादा है। ब्रिटेन (Britain) में किए गए एक छोटे से पायलट अध्ययन से यह पता चला है। बीबीसी (BBC) की रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन में ऑक्सफोर्ड, शेफील्ड, कार्डिफ और मैनचेस्टर विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने फेफड़ों की असामान्यताओं का पता लगाने के लिए एक नई जेनन गैस स्कैन पद्धति का इस्तेमाल किया, जिन्हें नियमित स्कैन से पहचाना नहीं गया था।

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टीम ने लोगों के तीन समूहों में जेनन गैस स्कैन और अन्य फेफड़ों (lungs) के कार्य परीक्षणों की तुलना की। एमआरआई स्कैन के दौरान सभी प्रतिभागियों ने जेनन गैस में श्वास लिया। रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक यह देखने में सक्षम थे कि यह फेफड़ों से रक्तप्रवाह में कितनी अच्छी तरह से चला गया है। शोधकर्ताओं (Researchers) ने पाया कि लंबे समय तक रहने वाले अधिकांश लोगों के लिएए स्वस्थ नियंत्रण की तुलना में गैस हस्तांतरण कम प्रभावी था। जिन लोगों को कोविड (Covid) के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनमें समान असामान्यताएं थीं। प्रमुख शोधकर्ता और फेफड़े के विशेषज्ञ डॉ. एमिली फ्रेजर (Dr. Emily Fraser) के अनुसार लोगों के क्लिनिक में आने और उन्हें यह समझाने में सक्षम नहीं होना निराशाजनक था कि ऐसा क्यों था कि उनकी सांस फूल रही थी।

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अकसर एक्स-रे (X-ray) और सीटी स्कैन में कोई असामान्यता नहीं दिखाई देती है। फ्रेजर के हवाले से कहा गया, यह महत्वपूर्ण शोध है और मुझे उम्मीद है कि इससे इस पर और प्रकाश पड़ेगा। यह महत्वपूर्ण है कि लोगों को पता चले कि रिहैब रणनीति और सांस लेने का प्रशिक्षण वास्तव में मददगार हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि निष्कर्ष कुछ प्रकाश डालते हैं कि लंबे कोविड समय में सांस फूलना इतना आम क्यों है। हालांकि सांस की कमी महसूस करने के अकसर कई और जटिल कारण होते हैं।

….आईएएनएस

 

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